■ महाराष्ट्र की तुलना में कर्नाटक, तेलंगाना, गुजरात में बिजली सस्ती कैसे? अदानी के फायदे के लिए महाराष्ट्र की लूट.
मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य के बिजली उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलेगी, ऐसी घोषणा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने की थी। पांच वर्षों में बिजली दरों में कुल 50 प्रतिशत की कमी और पहले वर्ष में 10 प्रतिशत की कटौती का आश्वासन दिया गया था। लेकिन वास्तविकता इसके उलट है। बिजली दरों में कमी नहीं बल्कि 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने जा रही है। यह गंभीर आरोप लगाते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोंढे ने मुख्यमंत्री से इस पर स्पष्टीकरण की मांग की है।


तिलक भवन में आयोजित प्रेस वार्त में अतुल लोंढे ने कहा कि भाजपा और देवेंद्र फडणवीस की कथनी और करनी में अंतर है। पांच वर्षों में बिजली दर घटाने और किसानों को कर्जमाफी देने की घोषणा की गई थी, लेकिन महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी (MSEDCL) ने महाराष्ट्र विद्युत नियामक आयोग (MERC) के समक्ष 20 से 40 प्रतिशत तक बिजली दर वृद्धि का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। इस संबंध में नागपुर में जनसुनवाई भी हो चुकी है।


उनका आरोप है कि यह पूरा प्रयास अदानी को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।इस दरवृद्धि से राज्य के सामान्य उपभोक्ता तथा छोटे, मध्यम और लघु उद्योगों की कमर टूट जाएगी। पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी से परेशान जनता पर अब बिजली दर वृद्धि का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
लोंढे ने कहा कि पड़ोसी राज्यों में बिजली दर महाराष्ट्र से कम है। गुजरात में घरेलू बिजली दर 3.0 से 5.2 रुपये प्रति यूनिट, कर्नाटक में 3.7 से 7.3 रुपये प्रति यूनिट, तेलंगाना में 2 से 10 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि महाराष्ट्र में यही दर 4.4 से 12.8 रुपये प्रति यूनिट है। जब बिजली उत्पादन लागत लगभग समान है, तो महाराष्ट्र में दर अधिक क्यों हैं?उन्होंने आगे बताया कि MERC हर पांच वर्ष में बहुवर्षीय दर निर्धारण (MYT) आदेश जारी करता है। नया MYT आदेश 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। इस प्रक्रिया के तहत मसौदा जारी कर राज्यभर में सार्वजनिक सुनवाई की गई। विभिन्न औद्योगिक संगठनों और उपभोक्ताओं ने इसमें आपत्तियां दर्ज कीं।
इसके बाद 28 मार्च 2025 को अंतिम MYT आदेश जारी किया गया, जिसे उद्योग और राज्य की आर्थिक वृद्धि के लिए अनुकूल माना गया।लेकिन बाद में MSEDCL ने पुनर्विचार याचिका दायर की और MERC ने बिना नई जनसुनवाई और बिना नई आपत्तियां आमंत्रित किए 25 जून 2025 को संशोधित MYT आदेश जारी कर दिया। यह निर्णय प्रक्रियात्मक रूप से संदिग्ध और कानूनी रूप से चुनौती योग्य है।
विभिन्न संगठनों और सोलर परियोजना डेवलपर्स ने मुंबई उच्च न्यायालय में अपील की, जिसके बाद न्यायालय ने महावितरण को फटकार लगाते हुए पुराना आदेश लागू करने और पुनः जनसुनवाई करने का निर्देश दिया।लोंढे ने कहा कि महाराष्ट्र देश में सबसे महंगी बिजली वाला राज्य बन गया है। इससे नए उद्योग राज्य में आने से हिचक रहे हैं और कई मौजूदा उद्योग अन्य राज्यों में स्थानांतरण पर विचार कर रहे हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है।
MERC के संशोधित आदेश से बिजली दरों में 20 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले लघु और मध्यम उद्योगों पर गंभीर असर पड़ेगा।महंगी बिजली दरों के कारण कई LT और HT उपभोक्ताओं ने सौर ऊर्जा परियोजनाएं शुरू कीं। 6-7 वर्ष के निवेश वापसी (ROI) को ध्यान में रखकर बड़ी पूंजी लगाई गई, लेकिन नए आदेश से यह अवधि 4-5 वर्ष और बढ़ जाएगी, जिससे बैंक ऋण चुकाना भी कठिन होगा।
पहले पीक आवर्स शाम 6 से 10 बजे तक थे, जिन्हें अब शाम 5 से रात 12 बजे तक कर दिया गया है, जिससे अतिरिक्त लाभ समाप्त हो गया है। दिन में उत्पन्न अतिरिक्त सौर यूनिट्स का रात में समायोजन नहीं किया जाएगा, जिससे अतिरिक्त नुकसान होगा।लोंढे ने प्रश्न उठाया कि जब सौर ऊर्जा उत्पादन जरूरत से अधिक है, तब भी महावितरण पांच-पांच वर्षों के लिए थर्मल पावर के PPA क्यों कर रहा है? क्या यह किसी बड़े उद्योगपति के हित में तो नहीं?
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि महावितरण कहता है कि सोलर से उसकी आय प्रभावित होती है, तो फिर 16,000 मेगावॉट की मुख्यमंत्री कुसुम योजना क्यों चलाई जा रही है? यदि यही धन ऊर्जा भंडारण (स्टोरेज) प्रणाली पर खर्च किया जाए तो पीक आवर्स में लाभ कमाया जा सकता है।सौर परियोजनाओं से ट्रांसमिशन लॉस कम हुआ है और महावितरण को अतिरिक्त लाभ मिला है। दिन में उत्पन्न अतिरिक्त सौर बिजली अन्य उपभोक्ताओं को बेचकर 100 प्रतिशत लाभ कमाया जाता है, लेकिन इसका सार्वजनिक उल्लेख नहीं किया जाता।
अतुल लोंढे ने मांग की कि 25 जून 2025 का संशोधित MYT आदेश तुरंत रद्द किया जाए और 28 मार्च 2025 का पूर्व आदेश पुनः लागू किया जाए। सौर परियोजनाओं से होने वाली आय को सार्वजनिक किया जाए तथा राज्य सरकार तुरंत हस्तक्षेप कर पुनः जनसुनवाई आयोजित करे, ताकि महाराष्ट्र के औद्योगिक भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।


