मुंबई वार्ता संवाददाता

बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने और उन्हें संभावित खतरों से बचने के लिए तैयार करने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने ‘ब्रेव बडी’ पहल के तहत मुंबई के करीब 9,000 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही अपनी सुरक्षा, सही-गलत व्यवहार की पहचान और किसी असहज स्थिति में मदद मांगने के बारे में शिक्षित करना है।


इस कार्यक्रम के माध्यम से स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने और उन्हें अपनी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जा रहा है।


■ तीन से 13 वर्ष के बच्चों पर विशेष ध्यान
‘ब्रेव बडी’ कार्यक्रम के तहत तीन से 13 वर्ष की आयु के बच्चों को व्यक्तिगत सुरक्षा से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इसके लिए खेल, गतिविधियों और संवाद आधारित शिक्षण पद्धति का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस पहल को टारगेट लर्निंग वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
कार्यक्रम में सुरक्षा के पांच प्रमुख पहलुओं को शामिल किया गया है:
* शारीरिक सुरक्षा: अपने शरीर और व्यक्तिगत सीमाओं को समझना।
* भावनात्मक सुरक्षा: अपनी भावनाओं को पहचानना और व्यक्त करना।
* मानसिक सुरक्षा: कठिन या असहज परिस्थितियों से निपटने की समझ विकसित करना।
* डिजिटल सुरक्षा: इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित इस्तेमाल करना।
* सामाजिक सुरक्षा: दूसरे लोगों के साथ सुरक्षित व्यवहार और संबंधों की समझ विकसित करना।
■ मराठी और अंग्रेजी में तैयार की गई अध्ययन सामग्री
शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए अलग-अलग आयु वर्ग के बच्चों की जरूरतों के अनुसार चार प्रकार की शिक्षण किट तैयार की गई हैं। इन किट में अवधारणा आधारित पुस्तकें, शिक्षकों के लिए मार्गदर्शिकाएं, गतिविधियों की सामग्री, चित्रों के माध्यम से समझाने वाले संसाधन और अभ्यास पत्रक शामिल हैं। सामग्री मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है। शिक्षकों की सहायता के लिए प्रशिक्षण संबंधी वीडियो भी उपलब्ध कराए गए हैं।
■ खेल-खेल में सुरक्षा की समझ विकसित करने पर जोर
इस पहल के तहत बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों के जरिए सुरक्षा के बारे में सिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को संभावित असुरक्षित परिस्थितियों की पहचान करने, ऐसी स्थिति में उचित कदम उठाने और जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद व्यक्ति से मदद मांगने के लिए तैयार करना है।शिक्षकों का प्रशिक्षण 5 अक्टूबर से शुरू हुआ था और 13 अक्टूबर तक बीएमसी के स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से आयोजित किया गया। लोअर परेल, गोरेगांव और कुर्ला में हुए प्रशिक्षण सत्रों में 80 से 169 शिक्षकों के समूहों को शामिल किया गया।
बीएमसी की इस पहल का उद्देश्य बच्चों में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्कूलों में ऐसा वातावरण विकसित करना है, जहां बच्चे अपनी समस्याओं और असहज अनुभवों के बारे में बिना डर के बात कर सकें। शिक्षकों को इस दिशा में प्रशिक्षित करने से व्यक्तिगत सुरक्षा की शिक्षा को बच्चों की रोजमर्रा की सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


