■ पुणे पुलिस को मानवाधिकार आयोग की फटकार फडणवीस के कामकाज पर कलंक, अहिल्यानगर की घटना पर आरोपियों पर मकोका लगाने की मांग।
मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्य में मंत्रियों के परिवार भी सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का क्या होगा? सपकाल ने फडणवीस को गृह मंत्री के रूप में विफल बताते हुए उनसे पद छोड़ने की मांग की।


उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र पुलिस, जो कभी पूरे देश में अपनी कार्यक्षमता और दबदबे के लिए जानी जाती थी, पिछले 12-13 वर्षों में लगातार बदनाम हुई है और अब राजनीतिक विरोधियों पर कार्रवाई तथा वसूली तक सीमित होती जा रही है।
सपकाल ने भाजपा-महायुति सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि मंत्री अतुल सावे के भाई और भतीजे पर छत्रपति संभाजीनगर जिले में जानलेवा हमला किया गया। इससे पहले जलगांव में केंद्रीय मंत्री की बेटी से छेड़छाड़ की घटना सामने आई थी, जिसके बाद स्वयं केंद्रीय मंत्री को पुलिस थाने जाकर शिकायत दर्ज करानी पड़ी। उन्होंने आरोप लगाया कि आका, खोके, कोयता गिरोह, गुंडों और गैंगस्टरों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और वे खुलेआम घूम रहे हैं।
उन्होंने कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों का काला कारोबार भी जारी है। केवल ‘ड्रग्स फ्री महाराष्ट्र’ का नारा देने से राज्य को नशे के शिकंजे से मुक्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है, जो फडणवीस सरकार में दिखाई नहीं देती।
■ पुणे पुलिस पर मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई पर सवाल
सपकाल ने पुणे पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई को गंभीरता से लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने पुणे पुलिस आयुक्त अमितेशकुमार, पुलिस उपायुक्त मिलिंद मोहिते और सह पुलिस आयुक्त राहुल आवारे सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। नाबालिग आरोपियों को कार के बोनट पर बैठाकर जुलूस निकालने के मामले में आयोग की फटकार को उन्होंने गंभीर बताया।
सपकाल ने कहा कि पुणे पुलिस के खिलाफ मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई की सिफारिश गृह मंत्री के रूप में फडणवीस के कामकाज पर बड़ा सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुणे की स्थिति अब ‘क्राइम कैपिटल’ जैसी हो गई है।
■ गोरक्षा के नाम पर अमानवीयता का आरोप
अहिल्यानगर जिले में विजय शेलके और महेश जाधव के साथ कथित तौर पर गोरक्षा के नाम पर किए गए अमानवीय व्यवहार को लेकर भी सपकाल ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों को रास्ते में पकड़कर निर्वस्त्र किया गया, पीटा गया और जबरन पेशाब पिलाया गया। उन्होंने इस घटना को शर्मनाक बताते हुए आरोपियों के खिलाफ मकोका के तहत कार्रवाई करने और गोरक्षा के नाम पर चल रहे ऐसे कथित अत्याचारों को तत्काल रोकने की मांग की।
सपकाल ने कहा कि पिछले महीने जालना जिले में भी मानवता को शर्मसार करने वाली ऐसी ही घटना सामने आई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो गया है और फडणवीस सरकार की नाकामी के कारण महाराष्ट्र की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस का मूल सिद्धांत ‘सद्रक्षणाय खलनिग्रहणाय’ यानी सज्जनों की रक्षा और दुष्टों का दमन है, लेकिन मौजूदा सरकार में पुलिस की भूमिका इसके विपरीत होती जा रही है। सपकाल ने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुधारने में विफल रहने वाले गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ देना चाहिए।


