मनपा चुनाव:मुंबई के राजनैतिक दलों को भारी पड़ सकती है फेरीवालों की नाराजगी।

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जय सिंह/मुंबई वार्ता

मुंबई के राजनैतिक दलों को इस बार के मनपा चुनाव में फेरीवालों की नाराजगी महंगी पड़ सकती है। भारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे फेरीवालों के परिवार विरोधी रवैया अपनाने वाले दलों को सबक सिखाने के लिए एकजुट होकर मतदान कर सकते हैं।

एक तरफ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी फेरीवालो को हर तरह की मदद करते है, दूसरी तरफ मुंबई महानगर पालिका उन्हें व्यवसाय नहीं करने देती। धंधा बंद होने से मुंबई के लाखों फेरीवालों का परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गया हैं। गरीबी और विषाद की स्थिति में फेरीवालों द्वारा आत्महत्या जैसा अप्रिय कदम उठाए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।

सयुक्त फेरीवाला महासंघ मुंबई का कहना है कि पीएम मोदीजी, महाराष्ट्र सरकार के सभी मंत्री , आरपीआई के श्री रामदास आठवले, भाजपा के एडवोकेट आशीष शेलlर, शिवसेना के उद्धवजी ठाकरे, मनसे के राज ठाकरे सहित अन्य नेताओं को फेरीवालों की स्थिति की जानकारी दी गई है ।

संयुक्त फेरीवाला महासंघ मुंबई द्वारा आजाद मैदान में अभी हाल ही में फेरीवालों का विराट मोर्चा आयोजित किया गया था,जिसमें हजारों फेरीवाले अपने अपने परिवार के साथआए थे । पिछले कई महीनों से मुंबई के फेरीवालों को धंधा नहीं करने दिया जा रहा है, जिस कारण उनके घर का चूल्हा नहीं जल रहा है, बच्चों की पढ़ाई बंद है तथा बीमार लोगों का इलाज नहीं हो पा रहा है। उनको न्याय दिलाने के लिए आजाद मैदान में आंदोलन किया गया था इस आंदोलन में सभी हॉकर्स यूनियन/संगठन ने एक मंच पर आकर एकता दिखाई।

मुंबई में हाईफाई इमारत में रहने वाले मनमौजी मतदाता है ।मध्यम वर्गीय अपने आप में परेशान मतदाता है, लेकिन मतदान करते हैं । झोपड़पटी , चाली, एसआरए बील्डिंग में रहने वाले मतदाता अधिक से अधिक मतदान करते है। इनमें फेरीवालों की संख्या अधिक है। आज महंगाई में अपने बजेट मे घर संसार चलाने में फेरीवालों का बहुत बड़ा योगदान है ।महंगाई का असर हाईफाई लोगों को नहीं पड़ता, इसलिए वो मतदान करने में लापरवाह रहते हैं।

मुंबई के 80 % मतदाता का सबंध फेरीवालों से है । किसी भी पार्टी को बहुमत फेरीवालों के सपोर्ट के बिना संभव नहीं है। मुंबई में करीब 3 लाख फेरीवाले और 3 लाख फेरीवाले के सहायक हैं। इन 6 लाख लोगों के परिजनों की संख्या अगर जोड़ी जाए तो यह संख्या 30 लाख तक पहुंच जाती है। ये लोग जिन किसानों, कारीगरों, उत्पादकों का सामान बेचते हैं उनकी संख्या यदि जोड़ दी जाए तो 60 – 70 प्रतिशत तक मतदाता फेरीवाला व्यवसाय से जुड़े हैं। मुंबई ही नहीं बल्कि फेरीवालों का असर महाराष्ट्र,बिहार और उत्तर प्रदेश तक के चुनाव में होता है। क्योंकि ज्यादातर फेरीवाले महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश के है।मुंबई के फेरीवाले जिद मे आ गये तो वो जिसे चाहे उसे जिता -हारा सकते हैं। किसानों के बाद सबसे ज्यादा मतदाता फेरीवाला व्यवसाय से हैं।

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