■ आधुनिक तकनीक और विजुअल इफेक्ट्स के जरिए जेन-जी दर्शकों को जोड़ने की पहल : सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार
मुंबई वार्ता संवाददाता

मराठी फिल्म जगत की नई पीढ़ी, विशेष रूप से जेन-जी दर्शकों को आकर्षित करने और आधुनिक तकनीक, विजुअल इफेक्ट्स तथा अन्य तकनीकी माध्यमों का प्रभावी उपयोग करने वाली एक विशेष फिल्म के निर्माण में महाराष्ट्र सरकार सहभागी बनेगी। यह घोषणा सांस्कृतिक कार्य मंत्री एडवोकेट आशीष शेलार ने की।


प्रभादेवी स्थित पु. ल. देशपांडे महाराष्ट्र कला अकादमी में महाराष्ट्र फिल्म, रंगभूमि और सांस्कृतिक विकास महामंडल लिमिटेड तथा अखिल भारतीय मराठी चित्रपट महामंडल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित परिसंवाद में शेलार बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि मराठी फिल्मों में गुणवत्ता, नवीनता और अभिनय के स्तर पर किसी तरह की कमी नहीं है, लेकिन व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक ‘कनेक्टिंग लिंक’ पर काम करने की जरूरत है।
शेलार ने कहा कि फिल्म निर्माण के साथ-साथ स्क्रीन की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था और दर्शक वर्ग का भी गंभीरता से अध्ययन किया जाना चाहिए। यदि इस दिशा में व्यावहारिक मॉडल तैयार होता है तो महाराष्ट्र सरकार उसमें निवेशक की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
उन्होंने मराठी फिल्मों के लिए उपलब्ध स्क्रीन की संख्या और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही नए दर्शक वर्ग के निर्माण पर भी जोर दिया। दक्षिण भारतीय फिल्मों को मिलने वाले भावनात्मक दर्शक समर्थन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मराठी फिल्मों के लिए भी नई पीढ़ी के साथ भावनात्मक जुड़ाव रखने वाला मजबूत दर्शक वर्ग तैयार करना जरूरी है।
■ एआई और आधुनिक तकनीक को चुनौती नहीं, अवसर बनाएं
मंत्री शेलार ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), नए डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक फिल्म उद्योग के सामने चुनौती जरूर हैं, लेकिन इन्हें अवसर में बदलने की आवश्यकता है। इसके लिए तकनीक, एआई की उपयोगिता और उससे जुड़ी चुनौतियों पर प्रायोगिक प्रदर्शन के साथ चर्चासत्र और कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश उन्होंने दिए।
उन्होंने कहा कि मराठी जेन-जी दर्शक अन्य भाषाओं के मनोरंजन की ओर आकर्षित होने के बजाय मराठी फिल्मों की ओर आएं, इसके लिए मराठी सिनेमा का मूल स्वरूप और आत्मा कायम रखते हुए आधुनिक तकनीक, विजुअल इफेक्ट्स और बेहतर निर्माण गुणवत्ता का इस्तेमाल करना जरूरी है। ऐसी फिल्म के निर्माण का पूरा आर्थिक बोझ केवल निर्माताओं पर न पड़े, इसके लिए राज्य सरकार को भी इसमें भागीदारी करनी चाहिए।
■ फिल्मसिटी को केवल शूटिंग स्थल नहीं, संपूर्ण फिल्म उद्योग की व्यवस्था बनाने का प्रयास : स्वाती म्हसे पाटील
फिल्मसिटी की प्रबंध निदेशक स्वाती म्हसे पाटील ने कहा कि फिल्म केवल कला या व्यवसाय नहीं, बल्कि कला, तकनीक, अर्थव्यवस्था, निर्माण और संस्कृति का सुंदर संगम है। बदलती तकनीक के दौर में फिल्मसिटी की भूमिका केवल शूटिंग के लिए जगह उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि फिल्म उद्योग के लिए संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की दिशा में काम होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, स्मार्ट टीवी और ओटीटी के बढ़ते प्रभाव से फिल्म निर्माण, संपादन और दर्शकों के फिल्म देखने के तौर-तरीकों में बड़े बदलाव आए हैं। इन बदलावों से नई चुनौतियां पैदा हुई हैं, लेकिन साथ ही नए अवसर भी सामने आए हैं।
स्वाती म्हसे पाटील ने बताया कि फिल्मसिटी की ओर से बुनियादी सुविधाओं, कौशल विकास, तकनीक और कारोबार सुगमता पर काम किया जा रहा है। इसके लिए पांच प्रमुख आधार स्तंभ तय किए गए हैं। उन्होंने कहा कि महामंडल अपने 50वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है और इस परिसंवाद से फिल्म उद्योग के विकास के लिए उपयोगी विचार-विमर्श होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि मराठी फिल्म उद्योग का निश्चित रूप से स्वर्णिम दौर आएगा।
कार्यक्रम में फिल्मसिटी की प्रबंध निदेशक स्वाती म्हसे पाटील, उप प्रबंध निदेशक प्रशांत साजनीकर, महेश मांजरेकर, अशोक राणे, मेघराज राजेभोसले, राजेश मापुस्कर, सुशांत शेलार सहित अनेक फिल्मकर्मी उपस्थित थे।


