मुंबई वार्ता संवाददाता

महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन के पास पश्चिम रेलवे लाइन पर बन रहे भव्य केबल-स्टेड फ्लाईओवर का महानगरपालिका (बीएमसी) क्षेत्र का 70 से 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, लेकिन रेलवे सीमा के भीतर निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इसके चलते परियोजना में कम से कम छह महीने की अतिरिक्त देरी होने की संभावना है।


बीएमसी ने इस फ्लाईओवर को निर्धारित समय से पहले पूरा करने की योजना बनाई थी और इसे अक्टूबर 2026 तक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया था। इसी उद्देश्य से बीएमसी क्षेत्र में निर्माण कार्य युद्धस्तर पर किया गया। हालांकि रेलवे हिस्से का काम शुरू न होने के कारण अब यह फ्लाईओवर अक्टूबर 2026 तक शुरू होना संभव नहीं दिख रहा है। अधिकारियों के अनुसार अब इस पुल पर वाहनों की आवाजाही वर्ष 2027 में ही शुरू हो सकेगी।
महालक्ष्मी रेलवे स्टेशन क्षेत्र में भारी यातायात के कारण रोजाना जाम की समस्या रहती है। इसी को देखते हुए डॉ. ई. मोसेस मार्ग पर फ्लाईओवर तथा केशवराव खाड्ये मार्ग पर आधुनिक केबल-स्टेड फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, इस परियोजना के लिए 78 मीटर ऊंचा मुख्य पिलर तैयार किया जा चुका है और पुल के दोनों ओर का निर्माण साथ-साथ चल रहा है। रेलवे सीमा के भीतर काम करने के लिए मेगा ब्लॉक की आवश्यकता होगी। इसके अलावा अतिरिक्त मशीनरी, श्रमिकों की तैनाती और निर्माण सामग्री की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी योजना बनाई गई है।
■ बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक पर भी धीमी रफ्तार
वहीं, बांद्रा-वर्सोवा समुद्री सेतु परियोजना की प्रगति भी अपेक्षा से धीमी बनी हुई है। मई 2026 तक 35 प्रतिशत कार्य पूरा होना चाहिए था, लेकिन अब तक केवल 30 प्रतिशत निर्माण ही पूरा हो पाया है।
इस पर महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) ने ठेकेदार को चेतावनी दी है कि यदि जनवरी 2027 तक परियोजना का 50 प्रतिशत काम पूरा नहीं हुआ तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
यह परियोजना वर्ष 2019 में शुरू हुई थी और चार वर्षों में पूरी होनी थी, लेकिन कोरोना महामारी और ठेकेदार की साझेदारी से जुड़े विवादों के कारण काम लंबे समय तक प्रभावित रहा। बाद में ठेकेदार बदलने के बाद 2022 में काम दोबारा शुरू हुआ, लेकिन अब भी प्रगति निर्धारित लक्ष्य से पीछे है। ऐसे में अगले छह महीनों में 20 प्रतिशत अतिरिक्त काम पूरा करना ठेकेदार के सामने बड़ी चुनौती होगी।


