सतीश सोनी/मुंबई वार्ता

गुरुवार को अपार संपत्ति के वारिस और एक बड़े कारोबारी के बेटों ने विलासिता की जिंदगी को ठुकराकर आध्यात्म का रास्ता चुना। इन चारों युवक-युवतियों ने दीक्षा ली और जैन साधु-साध्वियां बन गये।
उनके दीक्षा समारोह के लिए उदयपुर में १.२५ लाख वर्ग फीट क्षेत्र में फैला एक महल बनाया गया था। वहां, गुरुवार को चार युवकों ने सार्वजनिक रूप से अपने सांसारिक जीवन का त्याग कर दिया। अब वे साधु का रूप धारण करेंगे।
●मुंबई के चार युवक-युवतियों ने अपनी सारी संपत्ति त्याग दी
आर्यन जावेरी, वृष्टि बाउवा, ध्रुति नागदा और युति शाह ने विलासितापूर्ण जीवन त्यागकर भिक्षु और भिक्षुणी बनने का निर्णय लिया है। ये चारों युवक मौज-मस्ती और विलासिता का जीवन जी रहे थे। हालाँकि, अब वे आध्यात्मिक जीवन के पथ पर अग्रसर होने वाले हैं।महत्वपूर्ण बात यह है कि ये सभी युवक-युवतियां बड़े उद्योगपति परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। आर्यन जावेरी नामक युवा को नई जगहों पर घूमने और खाने का शौक था। वृष्टि को बाइक पर यात्रा करना बहुत पसंद था। ध्रुति को गाने सुनने का बहुत शौक था। युति को फिल्में देखने का शौक था, लेकिन अब उन चारों ने यह सारा जुनून और आनंद छोड़ दिया है, और यह जुनून उनके लिए अतीत की बात हो गई है।
आर्यन बचपन से ही दीक्षा लेकर साधु बनना चाहते थे। 24 वर्षीय आर्यन सैकड़ों करोड़ की संपत्ति के उत्तराधिकारी हैं। उनके पिता जुबिन जावेरी एक दवा कंपनी के मालिक हैं। जुबिन जावेरी ने बताया कि जब आर्यन सातवीं कक्षा में थे, तब उन्होंने पहली बार दीक्षा लेने की बात कही थी। उस समय उनके पिता ने उन्हें पहले अपनी शिक्षा पूरी करने की सलाह दी। स्कूल पूरा करने के बाद उन्हें डिग्री हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।


