■ भाजपा नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने बीएमसी से की मांग।
मुंबई वार्ता/ श्रीश उपाध्याय

‘अंधेर नगरी- अनबुझ राजा, टका सेर भाजी-टका सेर खाजा’ , यह कहावत आपने सुनी जरूर होगी और अगर चरितार्थ होते देखना चाहते हैं तो भाजपा नगरसेवक मकरंद नार्वेकर का मुंबई मनपा से किया आवेदन पढ़े।


मुंबई में बढ़ते प्रदूषण और ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में सत्ताधारी बीजेपी के नगरसेवक मकरंद नार्वेकर ने एक अनोखा प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने दक्षिण मुंबई के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में ‘कंजेशन टैक्स’ लागू करने की मांग की है।नगरसेवक नार्वेकर के अनुसार, यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो शहर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण पर स्थायी रूप से नियंत्रण पाया जा सकता है।


उन्होंने सुझाव दिया है कि जिन निजी वाहनों में केवल एक व्यक्ति यात्रा करता है, उन पर कंजेशन टैक्स लगाया जाए। इससे अनावश्यक वाहनों की संख्या कम होगी और लोग सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे।उन्होंने बताया कि लंदन, न्यूयॉर्क और सिंगापुर जैसे वैश्विक शहरों में कंजेशन टैक्स की व्यवस्था पहले से लागू है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इन शहरों में इस कर प्रणाली के जरिए सड़कों पर वाहनों की संख्या नियंत्रित करने में सफलता मिली है।


मकरंद नार्वेकर का मानना है कि यदि मुंबई और उपनगरों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू की जाती है तो सड़कों पर वाहनों की संख्या घटेगी, जिससे ट्रैफिक जाम कम होगा और वायु प्रदूषण के स्तर में भी सुधार आएगा।
इसी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व उपमहापौर एवं वरिष्ठ कॉंग्रेस नेता राजेश शर्मा ने कहा कि मुंबई में ट्राफिक और प्रदूषण की समस्या विकराल रूप ले चुकी है। इस पर प्रशासन को गंभीरता से विचार करना चाहिए लेकिन किसी के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं करना चाहिए। सरकार वाहन मालिकों से रोड टैक्स और वाहन टैक्स लेती है। ऐसे में किसी अकेले वाहन उपयोग करने वाले पर टैक्स मढ़ने का मैं विरोध करता हूं।
इसी मामले पर मुंबई भाजपा महामंत्री पवन त्रिपाठी ने कहा कि मुझे मामले की जानकारी नहीं है। मैं प्रस्ताव देख कर ही प्रतिक्रिया दूँगा।
इसी मामले पर मुंबई भाजपा अध्यक्ष अमित साटम से बात करने की कोशिश की गई लेकिन साहब ने फोन उठाने की जहमत नहीं की। जो नेता पत्रकारों तक के फोन नहीं उठाते उन तक आम जनता कैसे पहुंचती होंगी। इनके जैसे अध्यक्ष होंगे तो नगरसेवको से जनता क्या अपेक्षा करेगी?
इसी मामले पर शिवसेना नगरसेवको से भी प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई लेकिन गठबंधन धर्म के कारण किसी ने भी कुछ भी बोलने से मना कर दिया हालांकि नाम गुप्त रखने की शर्त पर कहा कि जनता की समस्याओं को दूर करने के लिए जनसेवक की तरह सोचना चाहिए, किसी तानाशाह की तरह नहीं।
मुंबई में भाजपा नगरसेवक की इस हरकत को देखकर आम मुंबईकरों को अभी से प्रतीत होने लगा है कि अच्छा हुआ इनकी अकेले के दम पर महानगर पालिका में सत्ता नहीं आई वर्ना पता नहीं और कैसी कैसी उल-जलूल हरकते सहनी पड़ती ?


