मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में होटल और रेस्टोरेंट में खाना खाने वालों को आने वाले दिनों में अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है। खाद्य सामग्री, रसोई गैस, कर्मचारियों के वेतन, किराये और अन्य व्यावसायिक खर्चों में लगातार बढ़ोतरी के कारण मुंबई के रेस्टोरेंट में खाने-पीने की कीमतें 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ने की संभावना है। इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (आहार) ने बढ़ती लागत का हवाला देते हुए संभावित मूल्यवृद्धि की जानकारी दी है।


आहार के अनुसार, होटल और रेस्टोरेंट संचालक काफी समय से बढ़ते खर्चों का बोझ खुद उठाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अब लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण मौजूदा कीमतों पर कारोबार चलाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में खाने की कीमतों में संशोधन करना जरूरी माना जा रहा है।सब्जियों, दालों और गैस की बढ़ती कीमतों का असररेस्टोरेंट संचालकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खाद्य सामग्री की बढ़ती कीमतें हैं।
सब्जियों, दालों, प्याज, खाद्य तेल, दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों की कीमतों में वृद्धि से रसोई का खर्च बढ़ गया है। इसके अलावा व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडर और पाइप से मिलने वाली गैस की लागत भी होटल व्यवसाय को प्रभावित कर रही है।खाने-पीने की सामग्री खरीदने के साथ-साथ उसके परिवहन, भंडारण और पैकेजिंग पर होने वाला खर्च भी बढ़ा है। मुंबई में व्यावसायिक जगहों का किराया और कर्मचारियों का वेतन बढ़ने से रेस्टोरेंट संचालकों के मुनाफे पर दबाव पड़ रहा है।
■ इडली, डोसा और दाल-चावल भी हो सकते हैं महंगे
प्रस्तावित मूल्यवृद्धि का असर केवल महंगे रेस्टोरेंट तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। आम लोगों के रोजमर्रा के भोजन में शामिल इडली, डोसा, दाल-चावल और अन्य सामान्य व्यंजनों के दाम भी बढ़ सकते हैं। इसका असर विशेष रूप से उन लोगों पर पड़ेगा जो नौकरी, पढ़ाई या अन्य कारणों से नियमित रूप से बाहर खाना खाते हैं।यदि रेस्टोरेंट अपने मेन्यू की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करते हैं, तो ग्राहकों के मासिक भोजन बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, सभी होटल और रेस्टोरेंट एक समान दर से कीमतें बढ़ाएंगे, यह जरूरी नहीं है।
■ सफाई और खाद्य सुरक्षा पर बढ़ता खर्च भी एक कारण
रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता के मानकों को बनाए रखने के लिए भी अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। सफाई के लिए कर्मचारियों की व्यवस्था, आधुनिक उपकरणों की खरीद, कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर अधिक पैसा खर्च हो रहा है। खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर लगने वाले जुर्माने का दबाव भी कारोबारियों की चिंताओं में शामिल है।
■ हर रेस्टोरेंट अपने स्तर पर लेगा फैसला
आहार की ओर से प्रस्तावित मूल्यवृद्धि का अर्थ यह नहीं है कि मुंबई के सभी रेस्टोरेंट एक ही दिन और एक ही अनुपात में कीमतें बढ़ा देंगे। अलग-अलग प्रतिष्ठान अपनी लागत, कारोबार की स्थिति और ग्राहकों को ध्यान में रखकर वृद्धि की मात्रा और समय तय कर सकते हैं।फिलहाल, मुंबई के ग्राहकों को आने वाले दिनों में बाहर खाना खाने के लिए अधिक खर्च करने के लिए तैयार रहना पड़ सकता है। महंगाई के इस दौर में रेस्टोरेंट संचालकों के सामने कारोबार की लागत और ग्राहकों के बजट के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती होगी।


