मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई शहर में यातायात जाम से निजात दिलाने के लिए समय-समय पर नए मार्ग, बायपास और शॉर्टकट बनाए जाते हैं, लेकिन उचित योजना के अभाव में कई सड़कें राहत के बजाय नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही हैं।


कुर्ला स्थित कपाड़िया नगर चौराहे पर निर्मित वांद्रे और कलिना को जोड़ने वाला नया शॉर्टकट मार्ग इन दिनों इसी वजह से चर्चा में है।कलिना स्थित मुंबई विश्वविद्यालय के गेट नंबर 1 से वांद्रे पूर्व के भारत नगर तक जाने के लिए यह चार लेन का मार्ग विकसित किया गया है। यातायात जाम कम करने के उद्देश्य से बनाए गए इस मार्ग से गुजरते समय नागरिकों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कपाड़िया नगर चौराहे का यह चार लेन मार्ग उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन यहां आवश्यक बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ नजर आता है।सबसे बड़ी समस्या यह है कि विश्वविद्यालय परिसर से इस मार्ग का प्रवेश द्वार ढूंढना ही मुश्किल हो गया है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विश्वविद्यालय से इस चार लेन सड़क को जोड़ने वाला रास्ता केवल एक लेन का है, जिससे प्रवेश बिंदु पर ही यातायात जाम लग जाता है।
■ सुविधाओं का अभाव
मुंबई विकास समिति के कार्यकर्ता ए. वी. शेणॉय ने इस ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा, “यहां बुनियादी ढांचा बेहद कमजोर है। अंधेरा होने के बाद इस मार्ग का उपयोग करना खतरनाक हो जाता है। सड़क पर स्ट्रीट लाइट नहीं होने से पैदल यात्रियों और वाहन चालकों दोनों को परेशानी होती है। सार्वजनिक उपयोग के लिए सड़क खोलने से पहले आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी था।”
इसके अलावा भारत नगर की ओर जाने वाले मार्ग का एक हिस्सा अभी भी निर्माणाधीन है। इस हिस्से में डिवाइडर नहीं होने के कारण दोनों दिशाओं का यातायात एक ही लेन से संचालित किया जा रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका बढ़ गई है।
नाम न छापने की शर्त पर एक ऑटो चालक ने बताया, “सामने से दो वाहन या भारी गाड़ी आ जाए तो स्थिति बेहद मुश्किल हो जाती है। जब तक काम पूरा नहीं होता, यह इलाका दुर्घटना संभावित बना रहेगा।”
कलिना और वांद्रे जैसे दो महत्वपूर्ण इलाकों को कम समय में जोड़ने वाला यह मार्ग नागरिकों के लिए बेहद उपयोगी हो सकता है। लेकिन अधूरी सुविधाएं, अंधेरा और अधूरा निर्माण कार्य फिलहाल इस शॉर्टकट को परेशानी का सबब बना रहा है।
नागरिकों ने बीएमसी से मांग की है कि वह तत्काल ध्यान देकर कार्य पूर्ण करे, ताकि यह मार्ग पूरी क्षमता के साथ शुरू हो सके।


