■ सुरक्षा कारणों से सरकार का हाईकोर्ट में पक्ष.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई में जारी पवित्र रमजान माह के दौरान भी छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा के घरेलू टर्मिनल परिसर में अस्थायी शेड में ऑटो-टैक्सी व ओला-उबर चालकों को नमाज अदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, ऐसा रुख राज्य सरकार ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में स्पष्ट किया।


न्यायमूर्ति बर्गिस कुलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने इससे पहले सरकार और मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए कम से कम रमजान के दौरान नमाज के लिए एक स्थान उपलब्ध कराने पर विचार करने का निर्देश दिया था। इसी पृष्ठभूमि में हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार किया।
सरकार और एमएमआरडीए की ओर से अदालत को बताया गया कि घरेलू टर्मिनल से अति-महत्वपूर्ण व्यक्तियों (VVIP) का आवागमन होता है। ऐसे में वहां अस्थायी शेड बनाकर नमाज की अनुमति देना सुरक्षा की दृष्टि से जोखिमपूर्ण हो सकता है। साथ ही, सुरक्षा प्रबंधन से जुड़े अन्य व्यावहारिक मुद्दे भी उत्पन्न हो सकते हैं।
अदालत ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि याचिका को प्रतिकूल नजरिए से न देखा जाए और स्थायी समाधान खोजने का प्रयास किया जाए। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि केवल रमजान अवधि के लिए अस्थायी व्यवस्था की जाती है तो रमजान समाप्त होने के बाद शेड हटा दी जाएगी। साथ ही यह भी कहा कि सुरक्षा से समझौता किए बिना वैकल्पिक स्थान तलाशा जाए।सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि एयरपोर्ट उच्च-सुरक्षा क्षेत्र है और पुलिस बल को पहले ही व्यापक सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ती है।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, दिन में पांच बार नमाज के लिए 1500 से 2000 लोग एकत्रित होते हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही से सुरक्षा व्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा और एयरपोर्ट सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। पिछले एक वर्ष में बम धमकियों की घटनाओं का भी हवाला दिया गया।
वहीं, एयरपोर्ट प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रही अदानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स ने अदालत को बताया कि संबंधित स्थान से कुछ दूरी पर तीन मस्जिदें मौजूद हैं। एक मस्जिद लगभग एक किलोमीटर दूर है, जहां 13 मिनट में पहुंचा जा सकता है। दूसरी 1.3 किलोमीटर दूर है, जहां पैदल पहुंचने में करीब 18 मिनट लगते हैं, जबकि तीसरी 3 से 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। तीनों मस्जिदें वर्तमान में संचालित हैं।
मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार और संबंधित प्राधिकरणों को वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर अदालत को अवगत कराना होगा।


