मुंबई वार्ता संवाददाता

बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजे) श्री चंद्रशेखर के आवास पर मंगलवार देर रात आयोजित एक आपात सुनवाई में अदालत ने बड़ा निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त एवं बीएमसी-कम-जिला निर्वाचन अधिकारी भूषण गगरानी को आदेश दिया कि वे 22 दिसंबर को जारी अपने पत्र के आधार पर किसी भी तरह की कार्रवाई न करें, जिसमें अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को नगर निकाय चुनाव ड्यूटी के लिए बुलाया गया था।


यह आदेश नगर आयुक्त की ओर से अदालतों के स्टाफ की सेवाएं चुनाव कार्य के लिए मांगने संबंधी संचार पर स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए दायर याचिका पर पारित किया गया।


अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नगर आयुक्त को हाईकोर्ट या अधीनस्थ अदालतों के कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी के लिए तलब करने हेतु किसी भी प्रकार का पत्र या संचार जारी करने से रोका जाता है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी रेखांकित किया कि न्यायिक कार्य से जुड़े कर्मचारियों की सेवाओं को इस प्रकार चुनावी कार्यों में लगाने से न्यायिक व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए जब तक अदालत की अनुमति न हो, तब तक कोर्ट स्टाफ की चुनाव ड्यूटी के लिए तैनाती नहीं की जा सकती।
इस फैसले को न्यायिक स्वतंत्रता और अदालतों के कामकाज की निरंतरता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।


