मुंबई वार्ता संवाददाता

राज्य में ‘महायुति’ सरकार के सत्ता में आने में ‘लाड़ली बहन योजना’ की अहम भूमिका रही। इस योजना में अनियमितताएँ अब उजागर हुई हैं। तलाशी अभियान में सबसे ज़्यादा फर्जी लाभार्थी उपमुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ मंत्रियों के ज़िलों में पाए गए हैं। कुल २६ लाख ३४ हज़ार फर्जी लाभार्थी पाए गए हैं। इससे सरकारी खजाने से ५,१३६ करोड़ ३० लाख रुपये से ज़्यादा की लूट हुई हैं।


अजित पवार के पुणे ज़िले में २ लाख ४ हज़ार, एकनाथ शिंदे के ठाणे ज़िले में १ लाख 25 हज़ार ३०० और देवेंद्र फडणवीस के नागपुर ज़िले में ९५ हज़ार ५०० फर्जी लाभार्थी हैं। इस पृष्ठभूमि में, सरकार ने एक बार फिर राज्य भर में सभी पात्र ‘लाडली बहनों’ का ‘ई-केवाईसी’ पद्धति से सत्यापन करने का निर्णय लिया है।


विपक्ष ने इसकी आलोचना की है। एक वक्ता ने कहा है, “राज्य वित्तीय संकट में होने के बावजूद, जब मैंने ध्यान दिया, तो चुनाव के दौरान बिना किसी कारण के पैसे बाँटे जा रहे थे। इस योजना ने सरकारी खजाने पर भारी बोझ डाला है। अब सवाल यह है कि क्या सरकार यह ५,१३६ करोड़ रुपये वसूल पाएगी?”


