मुंबई वार्ता संवाददाता

विधान परिषद की 17 सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्ताधारी भाजपा महायुति का सत्ता का अहंकार साफ दिखाई दिया। “जिसकी लाठी, उसकी भैंस” की तर्ज पर इस चुनाव में सत्ताधारी पक्ष ने साम, दाम, दंड और भेद की नीति का इस्तेमाल किया। इस चुनाव में लोकतंत्र नहीं बल्कि ठोकशाही की तस्वीर देखने को मिली। “बलवान की ही चलती है” जैसी भाजपा की भूमिका रही है और अब विपक्षी दलों को समाप्त करने के बाद सहयोगी दलों को भी खत्म कर ‘वन नेशन, वन पार्टी’ की दिशा में आगे बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, ऐसा तीखा हमला महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने किया है।


चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव निष्पक्ष और भयमुक्त वातावरण में होने चाहिए। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से स्वस्थ और निष्पक्ष चुनावों का वातावरण दिखाई नहीं देता। सत्ताधारी भाजपा महायुति सत्ता का दुरुपयोग कर चुनाव जीत रही है तथा प्रशासन और चुनाव आयोग भी उनकी मदद कर रहे हैं। इसी कारण विपक्षी दलों के उम्मीदवारों को तोड़ना, उनके नामांकन पत्र खारिज कराना अथवा नामांकन वापस लेने के लिए दबाव बनाना जैसे घटनाक्रम लगातार देखने को मिल रहे हैं और विधान परिषद चुनाव में भी यही हुआ।भाजपा स्वयं को एक शक्तिशाली पार्टी बताती है, लेकिन उनके पास अपने उम्मीदवार तक नहीं हैं, इसलिए उन्हें अन्य दलों में तोड़फोड़ करनी पड़ती है।
कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए चुनाव लड़ती है, लेकिन सत्ता और धनबल के जोर पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। प्रत्येक मतदाता को 5-5 लाख रुपये तथा अन्य प्रलोभन दिए गए। सत्ताधारी पक्ष की जीत सत्ता और पैसे के घमंड की जीत है, ऐसा भी हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।कांग्रेस पार्टी के पास संख्या बल भले ही न हो, लेकिन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए हमारी यह लड़ाई जारी रहेगी। नागपुर में भी पर्याप्त संख्या बल नहीं होने के बावजूद वैचारिक संघर्ष की भूमिका से अतुल लोंढे ने चुनाव लड़ा। विधान परिषद चुनाव में हुई हार की समीक्षा के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक समिति जल्द ही गठित की जाएगी, ऐसा भी सपकाल ने कहा।


