■ ठेकेदारों को भुगतान के लिए आंदोलन करना पड़ रहा, फिर शक्तिपीठ परियोजना के लिए करोड़ों रुपये कहां से आएंगे?—सुप्रिया सुले
मुंबई वार्ता संवाददाता

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष एवं सांसद सुप्रिया सुले ने शक्तिपीठ महामार्ग परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों के भारी विरोध का मुद्दा उठाते हुए राज्य सरकार से सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को पहले राज्य की मौजूदा सड़कों की स्थिति सुधारनी चाहिए और उसके बाद ही बड़े प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ना चाहिए।


बारामती में पत्रकारों से बातचीत में सुप्रिया सुले ने कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग को लेकर स्थानीय लोगों का भारी विरोध है। ऐसे में सरकार को स्थानीय लोगों को साथ लेकर उनसे चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति गंभीर है और सरकार को किसी भी बड़े प्रोजेक्ट पर निर्णय लेने से पहले राज्य की वित्तीय स्थिति समेत सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए।
सुले ने राज्य की खराब सड़कों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि शक्तिपीठ महामार्ग बनाया जा रहा है, लेकिन राज्य के अन्य रास्तों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। नई पीढ़ी तकनीक का इस्तेमाल कर सड़कों और गड्ढों के वीडियो बनाकर भेज रही है। नासिक में सड़कों के गड्ढों को लेकर आंदोलन चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में स्थिति ऐसी हो गई है कि ‘गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा’, यह समझना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि सरकार को पहले राज्य की मौजूदा सड़कों की मरम्मत और स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए तथा उसके बाद ही किसी बड़े प्रोजेक्ट की योजना बनानी चाहिए।
■ ठेकेदारों के भुगतान पर भी सवाल
सुप्रिया सुले ने राज्य सरकार की आर्थिक नीति पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में ठेकेदारों को उनके काम का भुगतान नहीं मिलने के कारण आंदोलन करना पड़ रहा है। ऐसे में जब सरकार के पास ठेकेदारों को भुगतान करने के लिए पर्याप्त धन नहीं है, तो शक्तिपीठ महामार्ग जैसी परियोजना के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय कैसे लिया जा रहा है?
उन्होंने सवाल किया कि राज्य सरकार की आर्थिक नीति आखिर किस दिशा में जा रही है? यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
■ SIR में नाम जोड़ने के लिए दो महीने का समय
सुप्रिया सुले ने SIR को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, उन्हें नाम शामिल कराने के लिए दो महीने का समय दिया गया है। इस अवधि में मतदाता अपने नाम जोड़ सकते हैं और किसी गलती की स्थिति में उसे ठीक भी करा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के कार्यकर्ता अगले दो महीनों तक इस प्रक्रिया में लोगों की मदद करने के लिए काम करेंगे।
■ ‘बारह साल से चर्चा चल रही है’
राजनीतिक मुद्दों पर पूछे गए सवालों के जवाब में सुले ने कहा कि इस विषय पर उनकी चर्चा पिछले 12 वर्षों से चल रही है और सभी चैनल लगातार इसी मुद्दे को दिखा रहे हैं। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यह चर्चा अगले तीन साल भी चलने दीजिए, क्योंकि मीडिया चैनलों को भी अपना काम चलाना है।
उन्होंने यह भी कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार आज वे विपक्ष में हैं, इसलिए सरकार से सवाल पूछना और जनता के मुद्दे उठाना उनका अधिकार है।
इस दौरान सुप्रिया सुले ने संविधान द्वारा नागरिकों को दिए गए अभिव्यक्ति के अधिकार का भी उल्लेख किया और कहा कि नई पीढ़ी यदि शिक्षा तथा अन्य मुद्दों से जुड़ी वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए वीडियो बनाती है और शिकायत करती है, तो इसे अपराध नहीं माना जाना चाहिए।


