मुंबई वार्ता संवाददाता

पिछले हफ़्ते एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार मुंबई में 3 लाख से अधिक फ्लैट ऐसे हैं जो बिके नहीं हैं। उनका कोई खरीदार नहीं है। इसी तरह नोएडा और गुरुग्राम में 2 लाख से अधिक फ्लैट ऐसे हैं जो बिके नहीं है।


इस मामले पर बोलते हुए कॉंग्रेसी कार्यकर्ता चंद्रेश दुबे ने बताया कि,”अब यह संख्या और बढ़ गई है। वहीं पुणे शहर में भी 1 लाख फ्लैट का कोई खरीदार नहीं है। बेंगलुरु में भी 90 हज़ार फ्लैट अनसोल्ड है और पुणे के इर्द-गिर्द में करीब 75 हज़ार फ्लैट अनसोल्ड रहे। अब खेल समझिए। इन सब जगहों पर जो फ्लैट नहीं बिक रहे हैं वो मीडियन रेंज के फ्लैट्स हैं। नोयडा- गुरुग्राम में फ्लैट अनसोल्ड हैं उनमें अधिकतर फ्लैट की कीमत औसतन 45 लाख रूपये था जो लोअर मिडल या मिडल क्लास के लिए है जो वो नहीं ख़रीद पा रहे हैं। वहीं दिल्ली NCR-मुंबई इन सब जगहों पर जो अल्ट्रा लग्जरी फ्लैट्स जिनकी क़ीमत 12 करोड़ से 700 करोड़ है वो फ्लैट हाथो हाथ बिक रहा है।
■ आख़िर खेल क्या है यह?
उन्होंने कहा कि एक तरफ़ मिडल क्लास 45 लाख का फ्लैट नहीं ख़रीद पा रहा है दूसरी तरफ़ लग्ज़री फ्लैट हाथो हाथ बिक जा रहा है। NCR की तो छोड़िए। मैं दिल्ली में एक जगह ऐसी है वहाँ पर फ्लैट बनना तो दूर की बात, फ्लैट का नक्सा बिल्डर बनाता है उसी समय नक्से पर ही फ्लैट बिक जाता है। जबकि वहाँ पर शुरुआती कीमत फ्लैट का 8 करोड़ से स्टार्ट है। मतलब साफ़ है। मिडल क्लास के पास EMI भरने के पैसे नहीं हैं। वहीं महाभ्रष्ट ऑफिसर, कई सरकारी कर्मचारी, अन्य कई सरकारी विभागो के कर्मचारी ऐसे बहुतांश लोग है जो 10-12 करोड़ के फ्लैट ले रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैं तो सब आँख से देख रहा हूँ सामने। इतनी भ्रष्ट केन्द्र और राज्य की सरकार आज तक नहीं देखा,कभी न किताबो में पढ़ा। खुल कर ये लोग कहते हैं की काम लेकर आओ ,इतना तुम्हारा -इतना हमारा। फिर यही भ्रष्ट अधिकारी दलाल देश के भर के अन्य प्रमुख शहरो में और दिल्ली NCR में लग्ज़री फ्लैट ख़रीद कर काली कमाई खपा देते हैं ताकि उनके काली कमाई के ज़मा रूपये किसी जाँच वाली रेड में पकड़े न जाए। बहुत ही ज़्यादा भ्रष्टाचार का छुपा खेल खेला जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि, “दूसरा जितने भी रियल स्टेट कंपनियां हैं उसमें सबसे ज़्यादा पैसा नेताओ व उच्च अधिकारियों का ही लगा हुआ है। रूपये लगाने वाला भी भ्रष्ट और वो फ्लैट खरीदने वाला भी भ्रष्ट। एक भ्रष्ट का पैसा दूसरे भ्रष्ट के पास जा रहा है। इसलिए मार्केट में आम आदमी के रूपये-पैसे नहीं है। गिनती के लोगो के पास अरबों-खरबो रूपये है ।केंद्र सरकार अब फ्लैट घोटाला करवाकर गरीबों के हक का मकान छिन रही है । फ़िलहाल, केंद्र सरकार और अन्य राज्यों की सरकारों को इसकी जाँच करानी चाहिए और इस भ्रष्ट कार्य में लिप्त लोगों के ख़िलाफ़ सख़्त क़दम उठाने चाहिए ।”


