मुंबई वार्ता संवाददाता

केंद्र सरकार ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) पर बढ़ते दबाव और व्यापार घाटे (Trade Deficit) को नियंत्रित करने के लिए सोना और चांदी के आयात शुल्क में बड़ा इजाफा किया है। सरकार ने गोल्ड और सिल्वर पर इम्पोर्ट टैरिफ 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले के बाद देशभर में सोने-चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है।


यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से राष्ट्रीय हित में एक वर्ष तक सोना खरीदने से बचने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि बढ़ते बुलियन आयात से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना उपभोक्ता देश है। ऐसे में आयात शुल्क बढ़ने से सोने की मांग में कमी आने की संभावना जताई जा रही है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इससे व्यापार घाटा कम करने और कमजोर पड़ रहे रुपये को सहारा देने में मदद मिल सकती है।
■ विदेशी मुद्रा भंडार बचाने की कोशिश
सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखना है। पिछले कुछ वर्षों में सोने के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत का गोल्ड बार आयात 2022 में 36.5 अरब डॉलर से बढ़कर 2025 में 58.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से होने वाले आयात में तेज वृद्धि हुई है और भारत-UAE मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत दी गई टैरिफ रियायतें भी इसके लिए जिम्मेदार हैं। GTRI ने सरकार से इन रियायतों की समीक्षा करने की मांग की है।
■ सोना खरीदना अब और महंगा
आयात शुल्क बढ़ने का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ा है। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत कई बड़े शहरों में सोने और चांदी की कीमतों में उछाल दर्ज किया गया। ज्वेलर्स का कहना है कि आने वाले दिनों में गोल्ड की कीमतों में और तेजी आ सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सरकार का यह कदम अल्पकाल में आम ग्राहकों और ज्वेलरी उद्योग पर असर डाल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलने की उम्मीद है।


