हमदर्द का दर्द और पंतजली की खलीबली!

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डाॅ धीरज फूलमती सिंह/स्तंभकार/मुंबई वार्ता

बाबा रामदेव ने हाल ही में एक बयान दिया है कि..”शरबत के नाम पर एक कंपनी है जो शरबत तो देती है लेकिन शरबत से जो पैसा मिलता है उससे मदरसे और मस्जिदें बनवाती है.!” रामदेव का कहना था कि जैसे कुछ लोग लव जिहाद और वोट जिहाद से बचने की सलाह देते हैं, वैसे ही अब लोगों को ‘शरबत जिहाद’ से भी बचना चाहिए।

मानता हूँ कि यह बयान दोयम दर्जे का है,इस बयान से मेरी बिल्कुल भी सहमति नही है। एक बिजनेसमैन को ऐसे बेतुके बयान से बचना चाहिए। सभ्यत आचरण यही कहता है कि “अंधे को अंधा” नही बोलना चाहिए। एक बात जरूर ध्यान देने योग्य है कि बाबा रामदेव ने अपने बयान में “हमदर्द कंपनी” या उसके ब्रांड “रूह आफजा” का सीधे या उल्टे तौर पर नाम तक नही लिया लेकिन लोग हमदर्द और रूह आफजा के बचाव में आ गए है। …कही ऐसा तो नही कि ” चोर की दाढी में तिनका ” जैसा कुछ है ? कागज पर भले पंतजली कंपनी में स्वामी रामदेव की हिस्सेदारी नगण्य है पर एक सच्चाई यह भी है कि बाबा रामदेव लगभग 30 हजार करोड की कंपनी पतंजली के सर्वे सर्वा है और इस समय भारत के सबसे बडे माॅडल भी है।

जी हाँ आप ने बिल्कुल सही पढा,बाबा रामदेव इस समय भारत की माॅड्लिंग इंडस्ट्री की दुनिया में सबसे शीर्ष पर विराजमान है। स्वामी रामदेव की रिसर्च टीम भी बहुत ताकतवर है,ठोस सबूत खोज निकालती है। उनका मीडिया मैनेजमेंट भी बहुत तगडा और धारदार होता है। मान लेते है कि बाबा रामदेव ने सीधे तौर पर नही लेकिन इशारों ही इशारों में “हमदर्द और रूह आफजा ” पर निशाना साधा है तो आप को क्या लगता है कि इतना रसूखदार व्यक्ति यूं ही बिना किसी ठोस सबूत के हवाई फायर कर सकता है ?

बिल्कुल भी नही! बाबा रामदेव के पास जरूर ठोस सबूत होगे पर भारतीय संविधान की मर्यादा और नियम को देखते समझते हुए उन्होने “रूह आफजा और हमदर्द ” का सीधा सपाट नाम नही लिया है। सोशल मीडिया के दौर में अब यह बात छुपी नही रही रही,यह जग जाहिर हो चुकी है कि हमदर्द कंपनी सिर्फ एक विशेष कौम,मजहब के लोगो का समर्थन करती है,उनकी मदद करती है और वह विशेष समुदाय मुस्लिम धर्म के लोग है और यह गलत भी नही है क्यों कि सरकार, प्रशासन और संविधान इसकी इजाजत देता है और हमदर्द कंपनी संविधान के दायरे में रह कर ही मुस्लिम समुदाय की मदद करती है,उनकी भलाई और उत्थान के लिए कार्य करती है। यह बात मैं जानता हूँ और आप भी जान लिजिए।

दिल्ली की जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी की स्थापना साल 1989 में हुई थी,यह यूजीसी से मान्यताप्राप्त एक डीम्ड यूनिवर्सिटी है। भारत की कुल 128 डीम्ड यूनिवर्सिटी में इसका स्थान 63 वा है,जबकि समर्थक कुल 1128 युनिवर्सिटी में इसके 63 वे स्थान का जिक्र कर रहे है,जो की बिल्कुल गलत और भ्रामक है।हमदर्द कंपनी 1906 में “हकीम हाफिज अब्दुल मजीज” द्वारा शुरू की गई थी लेकिन उनकी ट्रस्ट को यूनिवर्सिटी शुरू करने में 85 साल लग गए। हमदर्द कंपनी के संस्थापक हाफिज थे तो जाहिर है,उन्होने अपनी शिक्षा दिक्षा मदरसे में ही हासिल की होगी! वही पंतजली कंपनी साल 2006 में शुरू हुई और पहला पंतजली गुरूकुलम साल 2017 में शुरू हुआ यानि स्थापना के ठीक 11 वर्ष बाद। इसके संस्थापक स्वामी रामदेव और बालकृष्ण है। हमदर्द एक प्रायवेट ट्रस्ट है, जो मुख्यतः गरीब मुस्लिम विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा देने के मकसद से शुरू किया गया था लेकिन आप को हमदर्द यूनिवर्सिटी की फीस पर नजर दौडानी चाहिए,फीस का उंचा स्तर देखकर लगता नही है कि यह गरीब मुस्लिमों के लिए शुरू की गई होगी ? उस पर नियम यह कि है मुस्लिम समुदाय के 50% विद्यार्थियों के लिए प्रवेश आरक्षित रहता है। वही पतंजली एक पब्लिक ट्रस्ट है,इस के गुरूकुल में मुफ्त शिक्षा दी जाती है। बाबा रामदेव अगले दस सालों में ऐसे सौ गुरूकुलम शुरू करने की योजना पर काम कर रहे है।

हमदर्द ट्रस्ट लखनऊ और बाराबंकी रोड पर दो बडे मदरसों का संचालन करता है। कानपुर, फतेहपुर और दिल्ली में भी इसके मदरसे है। कुल 26 मदरसो का संचालन हमदर्द ट्रस्ट करता है,जहां मुस्लिम समुदाय के गरीब बच्चे कुरान और इस्लाम धर्म की शिक्षा लेते है। भारत सरकार के दबाव और नियम की वजह से हमदर्द ट्रस्ट नें साव 2021 में इस बात को उजागर किया वर्ना अब तक वह इस बात को छुपाते आ रहा था!कोई माने या ना माने लेकिन अगर हम स्वामी रामदेव और हमदर्द के समर्थन या विरोध में है तो भी हम चाहे अनचाहे बाबा रामदेव के गुलाब शर्बत का प्रचार ही कर रहे है क्योकि रूह आफजा तो पहले से ही बाजार का सिरमौर है।

लखनऊ के लुलु माॅल के नमाज विवाद को याद किजिए, सोशल मीडिया ने उसे लखनऊ का नंबर माॅल बना दिया है शायद पतंजली का गुलाम शर्बत भी उसी राह पर है,गर्मी का मौसम भी आ गया है,ताजगी देने वाले ठंडे-ठंडे, कूल-कूल शर्बत की खपत भी बढेगी!

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