- ड्रोन की लेगी मदद
मुंबई (सं. भा.) रेलवे को मॉनसून से पहले और मॉनसून के बीच में ट्रैक के आसपास की घास और जंगली वनस्पति हटानी पड़ती है। मॉनसून के दौरान पटरियों के रख-रखाव का यह महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस खरपतवार के कारण कई बार पटरियों में पड़ी दरारें या अन्य कमियां नजर नहीं आती हैं। बहरहाल, इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए अब आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। हार्बर लाइन पर इसका ट्रायल हुआ। यहां ड्रोन की मदद से स्प्रे कर खरपतवार को नष्ट किया गया। मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वनिल नीला ने बताया कि तुर्भे में प्राइवेट कंपनी द्वारा खरपतवार नाशक स्प्रे का छिड़काव किया गया। ड्रोन की मदद से किए गए छिड़काव के परिणाम काफी उत्साहजनक रहे। नीला ने बताया कि मॉनसून से पहले पटरियों के आसपास घास और जंगली घास हटाने का काम मैन्युअली होता है। कई बार घास की आड़ में सांप-बिच्छू भी रहते हैं और ट्रैक का रखरखाव करने वालों को इससे खतरा रहता है। इसके अलावा खरपतवार से पटरियों की वास्तविक स्थिति को देखना भी मुश्किल होता है। नीला ने बताया कि मॉनसून से पहले और मॉनसून के बीच में दो बार यह काम किया जाता है। बहरहाल, ड्रोन से किए गए ट्रायल के बाद अब इसे तकनीक की मदद से हटाने का फैसला लिया गया है। ट्रायल के दौरान 15 मिनट में 1 किमी तक स्प्रे हुआ, जबकि मैन्युअली छिड़काव करने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके अलावा मैन्युअली छिड़काव के मुकाबले 18 प्रतिशत ज्यादा बढ़िया परिणाम मिले। ड्रोन स्प्रे में 90 प्रतिशत कम पानी का इस्तेमाल होता है। एक अधिकारी ने बताया कि प्राइवेट एजेंसी द्वारा किए गए इस ट्रायल का फायदा हुआ है। इसलिए भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल होगा। यह तकनीक घाट सेक्शन में सबसे ज्यादा कारगर साबित होगी।


