● नगरपालिका एवं महानगरपालिका में सीवेज प्रबंधन और सतत समाधान पर कार्यशाला संपन्न .
मुंबई वार्ता संवाददाता

नदियों और झीलों में सीवेज (सांडपानी) के प्रवाह को रोकने और प्रदूषित पानी के पुनरोपयोग को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण विभाग एक समग्र योजना तैयार करेगा। साथ ही, तकनीकी प्रकोष्ठ (टेक्निकल सेल) की स्थापना की जाएगी, जो नगरपालिका और महानगरपालिकाओं में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नवीन तकनीकों के कार्यान्वयन में मदद करेगा। यह घोषणा पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने की।
वे “नगरपालिका अपशिष्ट जल प्रबंधन की खामियां, स्थायित्व और आगे की राह” विषय पर आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में बोल रही थीं।
इस कार्यक्रम का आयोजन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) और आईआईटी पवई के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।इस कार्यक्रम में नगरीय विकास (2) विभाग के प्रधान सचिव के.एच. गोविंदराज, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव डॉ. अविनाश ढाकणे, आईआईटी पवई के प्रोफेसर मुनेश कुमार चंदेल, प्रोफेसर अनिल कुमार दीक्षित, और महाराष्ट्र के विभिन्न नगरपालिका एवं महानगरपालिका क्षेत्रों के प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ उपस्थित थे।
● प्रदूषण नियंत्रण के लिए संगठित दृष्टिकोण
आवश्यकपर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने कहा कि ग्राम पंचायतों, नगरपालिकाओं और महानगरपालिकाओं से बहने वाला भारी मात्रा में अनुपचारित (बिना शुद्ध किए) प्रदूषित पानी नदियों में सीधे मिल जाता है, जिससे पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इसे रोकने के लिए पर्यावरण विभाग एक व्यवस्थित और तकनीकी योजना तैयार करेगा, जिसमें नदियों और झीलों के संरक्षण के उपाय शामिल होंगे।इसके अतिरिक्त, तकनीकी प्रकोष्ठ की स्थापना कर स्थानीय स्वशासी संस्थाओं को प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नवीन जल प्रबंधन तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।
मंत्री पंकजा मुंडे ने यह भी कहा कि कृषि में कीटनाशकों का उपयोग भी जल प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। इसे रोकने के लिए विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर सख्त प्रदूषण नियंत्रण उपाय लागू करने की आवश्यकता है। इसमें जनजागरण अभियान, आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई, और पर्यावरण नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना शामिल होगा। उन्होंने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी की अपील की, ताकि भविष्य की पीढ़ी को स्वच्छ पर्यावरण और बेहतर स्वास्थ्य मिल सके।
● सतत जल प्रबंधन को बढ़ावा
प्रधान सचिव के.एच. गोविंदराज ने कहा कि अनुपचारित सीवेज अक्सर पीने के पानी के स्रोतों को दूषित कर देता है। यदि सीवेज का उपचार करके उसी स्थान पर पुन: उपयोग किया जाए, तो प्रदूषण की समस्या को काफी हद तक हल किया जा सकता है।
उन्होंने जल शुद्धिकरण संयंत्रों की स्थापना, जनजागरण अभियान, और विभागों के बीच सहयोग को इस समस्या के समाधान के लिए आवश्यक बताया।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव डॉ. अविनाश ढाकणे ने राज्य के नगरपालिका क्षेत्रों में जल प्रदूषण की वर्तमान स्थिति और उसके प्रभावों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी।
इंदौर के डॉ. राकेश कुमार और आईआईटी मुंबई के प्रोफेसर अनिल कुमार ने प्राकृतिक तरीकों से प्रदूषण रोकने के उपायों पर अपने विचार साझा किए।
इसके अलावा, आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर बृजेश दुबे, महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण के कार्यकारी अभियंता तन्मय कांबले, और ईको एन्वायरमेंट प्रैक्टिस के प्रमुख अधिकारी कैलास शिरोडकर ने “प्रदूषित जल को शुद्ध करने के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत करने” पर अपने विचार रखे।मुंबई, कोकण, पश्चिम महाराष्ट्र, उत्तर महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, और विदर्भ के नगरपालिका अधिकारियों ने राज्य में प्रदूषित जल को नियंत्रित करने के लिए किए गए सफल प्रयोगों की जानकारी साझा की।
नवी मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त डॉ. कैलास शिंदे ने “सतत स्वच्छ जल समाधानों” पर एक प्रस्तुति दी।कार्यशाला का लाभइस कार्यशाला ने जल प्रबंधन में नवीन और सतत समाधानों के क्रियान्वयन के लिए ज्ञान साझा करने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया।


