● सिडको कन्वेंशन सेंटर में होगा दो दिवसीय सम्मेलन
● 29-30 मार्च को जुटेंगे देश-विदेश के हजारों आर्य समाजी
वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली एवं आर्य प्रतिनिधि सभा मुंबई के संयुक्त संयोजन में आर्य समाज का 150 वां स्थापना दिवस समारोह आयोजित किया जा रहा है।
नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको कन्वेंशन सेंटर में 29 एवं 30 मार्च को होने वाले दो दिवसीय महासम्मेलन में देश विदेश से हजारों आर्य समाज के अनुयायी इसमें शामिल होंगे। साथ ही प्रमुख अतिथियों के रूप में राज्य के मुख्यमंत्री, उपमुख़्यमंत्रियों और राज्यपाल को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
आर्य समाज गिरगांव, मुंबई के पदाधिकारी महावीर शर्मा ने बताया कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती ने 7 अप्रैल 1875 को दक्षिण मुंबई के गिरगांव के काकड़वाड़ी में आर्य समाज और इसके आर्य मंदिर की स्थापना की थी। महर्षि दयानंद सरस्वती का जन्म 12 फरवरी 1824 को गुजरात के टंकारा में हुआ था। उन्होंने ज्ञान की खोज के लिए 19 वर्ष की आयु में घर छोड़ दिया था। मथुरा में गुरु विरजानंद दंडी महाराज जी से शिक्षा और दीक्षा प्राप्त की।
महावीर शर्मा के अनुसार देश की समस्याओं को गहराई से समझने के बाद उन्होंने अपनी बेबाक बातें रखनी शुरू कर दी। जिससे समाज की सोच में बदलाव आना शुरू हो गया। महर्षि दयानंद सरस्वती ने सामाजिक समस्याओं का मूल कारण अंधविश्वास, सामाजिक कुरीतियां, अशिक्षा, छुआछूत, जातिवाद और लिंग भेद को समझा। उन्होंने एक-एक करके इस पर काम करना शुरू किया। चूंकि स्वामी जी समझ चुके थे कि उनका जीवन भी हमेशा के लिए नहीं रह सकता, इसलिए उन्होंने अपने समाज सुधार कार्य को विस्तार के लिए 7 अप्रैल सन् 1875 (चैत्र शुक्ल पक्ष पंचमी तिथि पर शनिवार, संवत 1931) को मुंबई में आर्यसमाज की स्थापना की थी। इसके बाद देश के अलग-अलग शहरों में आर्य समाज की स्थापना होने लगी। उन्होंने इसके लिए नियम और कानून बनाए और एक अद्भुत लोकतांत्रिक संरचना का निर्माण किया।
1883 में महर्षि दयानंद सरस्वती के ब्रह्मलीन होने के बाद उनकी स्मृति को संजोने के लिए डीएवी कॉलेज लाहौर की स्थापना की गई। आर्य समाज एक त्रिस्तरीय संगठन है। स्थानीय आर्य समाज सबसे नीचे है। इसके ऊपर प्रांत की आर्य प्रतिनिधि सभा है और सबसे ऊपर सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा आती है। इसके अंतर्गत आर्य समाज सभी शैक्षणिक, सांस्कृतिक, बौद्धिक, शारीरिक विकास और मानव सेवा की गतिविधियों का आयोजन करता है।आर्य समाज के विश्व भर में अनेक केंद्रवर्तमान में पूरे विश्व में लगभग 10000 आर्य समाज मंदिर हैं। जबकि आर्य समाज द्वारा डीएवी सहित लगभग 2500 स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। आवासीय शिक्षा प्रणाली पर लगभग 400 गुरुकुलों का संचालन किया जा रहा है। विभिन्न स्थानों पर 20 हजार से अधिक अनाथ बच्चों के पालन-पोषण के लिए कई अनाथालय संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा आर्य समाज द्वारा लगभग 1500 अस्पताल और औषधालय चलाए जा रहे हैं।
हर साल हजारों अंतर्जातीय विवाहों का सादगी से आयोजन किया जाता है। आर्य वीर दल द्वारा युवाओं के शारीरिक विकास हेतु हजारों व्यायामशालाओं का संचालन किया जाता है।नैतिक शिक्षा और शारीरिक विकास के लिए हर साल हजारों आवासीय शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। लाखों आदिवासियों की शिक्षा के लिए आदिवासी क्षेत्रों में स्कूलों का संचालन किया जाता है। गरीब एवं पिछड़े वर्ग के युवाओं की उच्च शिक्षा के लिए शहरों में स्थायी आवासीय केन्द्रों का संचालन तथा महिला सशक्तिकरण के लिए लघु उद्योग लगाने के लिए प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। साथ ही अनेक महिला आश्रम, वानप्रस्थ आश्रम एवं सन्यास आश्रम का संचालन किया जा रहा है।


