●100 साल बाद इस दिन शनिदेव करेंगे राशि परिवर्तन
● देश दुनिया के कई क्षेत्रों में दिख सकता है बदलाव
●15 दिन में दो ग्रहण, विश्व को प्रभावित करेंगे सूर्य और चंद्र
वरिष्ठ संवाददाता/मुंबई वार्ता
मार्च में जिस दिन न्याय के देवता शनिदेव अपनी कुंभ राशि में से निकल कर मीन राशि में गोचर करने वाले हैं उसी दिन साल का पहला आंशिक सूर्य ग्रहण भी लगेगा। यह दुर्लभ संयोग 100 साल बाद चैत्र अमावस्या पर 29 मार्च को होने जा रहा है। इसका प्रभाव देश और दुनिया में देखने को मिलेगा जिसमें कहीं सकारात्मक तो कहीं नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।
मार्च माह को धार्मिक, ज्योतिष और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। इस महीने 13 तारीख को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होलिका दहन किया जाएगा, जबकि 14 मार्च पूर्णिमा और प्रतिपदा के संयोग में होली खेली जाएगी। इसी दिन साल का पहला चंद्र ग्रहण भी लगेगा। पंचांग के अनुसार न्याय के देवता शनिदेव 29 मार्च को रात 11:01 बजे मीन राशि में प्रवेश करेंगे। इस माह 15 दिन में लगने वाला सूर्य और चंद्र ग्रहण खगोल विज्ञान की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है। साथ ही ज्योतिष शास्त्र के लिए भी उत्सुकता से भरा हुआ है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि बता दें साल का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च को लगने जा रहा है। जबकि 29 मार्च को साल का पहला सूर्य ग्रहण भी पड़ने वाला है। साल का पहला चंद्र ग्रहण 14 मार्च को सुबह 9:29 बजे से दोपहर 3:29 बजे तक रहने वाला है। यह चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। साल का पहला सूर्य ग्रहण 29 मार्च को चैत्र अमावस्या को दोपहर 2:20 बजे से शाम 6:14 बजे तक रहेगा। यह ग्रहण भी भारत में नहीं दिखाई देगा। यह सूर्य ग्रहण विशेष तिथि और योग में लगने जा रहा है। सभी ग्रहों में शनि का राशि परिवर्तन सबसे अहम माना जाता है। मंद गति से चलने के कारण शनि लगभग ढाई वर्ष बाद एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं।
पंचांग के अनुसार ऐसा लगभग 100 वर्ष बाद होगा जब शनि का राशि परिवर्तन और सूर्य ग्रहण का संयोग एक ही दिन होगा। इस तरह सूर्य ग्रहण पर राहु का प्रभाव पहले से ही रहेगा और साथ ही शनि गोचर के कारण शनि का प्रभाव भी पड़ेगा। राहु और शनि की अशुभ दृष्टि सूर्य ग्रहण के दौरान कुछ क्षेत्रों में पड़ सकती है जो कहीं खुशी तो कहीं गम लाने वाली हो सकती है।


