कैदियों को रोजगार, परिवार का बेड़ा पार, ‘श्रमदान’ के माध्यम से उपलब्ध है बाजार।

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● जैन आचार्य विद्यासागर महाराज की मुहिमप्रधानमंत्री मोदी भी हैं जैन मुनि के मुरीद

वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता

दिगंबर जैन समाज के आचार्य विद्यासागर महाराज ने समाज के उपेक्षित वर्गों को राष्ट्र की मुख्यधारा में लाने तथा उनके परिवार को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से 2016 में श्रमदान संस्था की स्थापना की थी।

धर्मार्थ ट्रस्ट ‘महाकवि पंडित भूरामल सामाजिक सहकार न्यास’ का एक हिस्सा, यह ट्रस्ट मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कई हथकरघा प्रशिक्षण केंद्र चलाता है। इसके माध्यम से आदिवासी क्षेत्र के जरूरतमंद परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने का अभियान शुरू किया गया था। इसके बाद में आचार्य जी का ध्यान उन कमजोर वर्ग के कैदियों पर गया जो क्षणिक आवेश में अथवा अनजाने में हुए अपराध के चलते जेलों में सजा काट रहे हैं। इनके जेल में जाने के बाद परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट उत्पन्न हो गया। इसको देखते श्रमदान ने जेल प्रावधानों के अनुसार समझौता कर इन कैदियों को जेलों में हथकरघा उपलब्ध कराकर उनसे वस्त्र निर्माण कराना शुरू किया और उन कपड़ों को संस्था के कारखानों में जनोपयोगी कपड़ों का निर्माण किया जाने लगा।

इन उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए ऑनलाइन से लेकर जगह जगह स्टोर खोला गया। इसकी एक शाखा मुंबई के मालाड पश्चिम, एसवी रोड पर शुरू की गई है। आज दिल्ली के तिहाड़ जेल, मप्र के सागर जिला जेल, उप्र के बनारस जिला जेल, आगरा जिला जेल, मथुरा जिला जेल तथा मिर्जापुर जिला जेल समेत कुल 6 जेलों के लगभग 400 कैदी हथकरघा चलाकर जेल से ही अपने परिवार को भरण पोषण कर रहे हैं। कैदी और उसके परिजनों का बैंक में संयुक्त खाता खोला गया है जिसमें उनकी मजदूरी जमा की जाती है।

श्रमदान से जुड़े रौनक जैन ने मुंबई वार्ता को बताया कि पूज्य संत आचार्य विद्या सागर महाराज जी की विचारधाराओं ने दुनिया भर में लाखों लोगों को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है। वर्ष 2015 में 30 उच्च शिक्षित युवाओं के एक दल ने निस्वार्थ मार्ग पर आगे बढ़ने तथा दूसरों की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित करने हेतु गुरुजी का आशीर्वाद प्राप्त किया। इन युवाओं ने मध्य प्रदेश के कई गांवों से जानकारी एकत्र करने में कई महीने बिताए। समस्याओं के विश्लेषण के बाद निष्कर्ष निकला कि ग्रामीण युवाओं को कृषि के अलावा आय के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है। विचार-विमर्श के बाद गुरुजी ने टीम को आशीर्वाद देकर ग्रामीण भारत में हथकरघा प्रशिक्षण एवं उत्पादन केन्द्र प्रारंभ और इसे श्रमदान का नाम दिया।

● प्रधानमंत्री मोदी ने भी लिया था आशीर्वाद

आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म 1946 में कर्नाटक में हुआ था। 1968 में अजमेर में आचार्य ज्ञानसागर महाराज से दीक्षा ली थी। देश का भ्रमण करते हुए सत्संग प्रवचन के माध्यम से समाज को दिशा देते रहे। 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भेंट कर आशीर्वाद लिया था। 2016 और 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनसे भेंट कर आशीर्वाद लिया था। 2024 में आचार्य विद्यासागर ब्रह्मलीन ह गए थे। आज भी उनका अभियान उनके अनुयायी देश भर में चला रहे हैं।

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