मुंबई वार्ता संवाददाता

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र राज्य में 5 वर्षों से लंबित पड़े स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर बड़ा फैसला किया है. सर्वोच्च अदालत ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए ओबीसी आरक्षण के मुकदमे के कारण रुके हुए चुनावों को संपन्न कराने का निर्देश दिया है.
ज्ञात हो कि 2022 से इस मुकदमे के कारण महाराष्ट्र की 32 महानगर पालिकाओं, नगररपालिकाओं के चुनाव नहीं हो सके हैं. अदालत ने कहा, “OBC समुदायों को आरक्षण कानून के अनुसार प्रदान किया जाएगा जैसा कि जेके बंठिया आयोग की 2022 की रिपोर्ट से पहले महाराष्ट्र राज्य में मौजूद था।”
न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश एनके सिंह की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए महाराष्ट्र चुनाव आयोग को 4 सप्ताह के भीतर स्थानीय निकाय चुनावों को अधिसूचित करने का निर्देश दिया.
खंडपीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया को चार महीने की अवधि के भीतर पूरा करने का प्रयास किया जाना चाहिए।ओबीसी आरक्षण पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशों की खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि निकाय चुनाव, बंठिया आयोग को चुनौती देने वाली याचिकाओं के परिणाम के अधीन होंगे और यह आदेश पार्टियों द्वारा उठाए गए विवादों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालेगा।
जाहिर है सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पनवेल, समेत राज्य की 32 महानगर पालिकाओं और नगरपालिकों के चुनाव की बाधाएं एक तरह से खत्म हो गई हैं. माना जा रहा है कि अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच स्थानीय निकायों के चुनाव हो जाएंगे.


