● देश दुनिया होगी प्रभावितलगभग 500 वर्ष बाद मिथुन में गुरु हुए अतिचारी
वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता

देवगुरु बृहस्पति ने 14 मई को मिथुन राशि में प्रवेश कर लिया है। गुरु के इस गोचर का देश दुनिया में मिलाजुला प्रभाव देखने को मिलेगा। लगभग 500 वर्षों के बाद गुरु इस साल अतिचारी गति शुरू करेंगे। अतिचारी गति का अर्थ है, सामान्य गति से तेज होकर तीव्र गति से गोचर करना। इसी वजह से इस साल 6 महीने के बाद ही गुरु कर्क राशि में गोचर कर जाएंगे। उसके बाद दिसंबर में वापस मिथुन राशि में आ जाएंगे।
गुरु का मिथुन राशि में गोचर यूं तो सभी क्षेत्रों में देखने को मिलेगा लेकिन कुछ राशियों पर इसका सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। इन राशियों को गुरु के गोचर से कई सकारात्मक और कुछ नकारात्मक फल मिल सकते हैं। ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि देवगुरु बृहस्पति करीब 12 वर्ष बाद मिथुन राशि में गोचर कर रहे हैं। गुरु 14 मई की रात 10:30 बजे मिथुन राशि में प्रवेश कर चुके हैं। गुरु मिथुन राशि में अतिचारी चाल से चलेंगे। गुरु की यह अतिचारी चाल 2032 तक रहेगी।
सामान्यतः गुरु 13 महीने बाद राशि परिवर्तन करते हैं। गुरु के अतिचारी होने यह 6 महीने के भीतर ही गोचर करते हुए अक्टूबर में कर्क राशि में प्रवेश कर जाएंगे, फिर इसी राशि में रहते हुए वक्री भी होंगे। दिसंबर में एक बार फिर से मिथुन राशि में वापस लौट आएंगे। वैदिक ज्योतिष में गुरु को ज्ञान, वैवाहिक जीवन, संतान, धर्म और शिक्षा का कारक ग्रह माना गया है।
● बृहस्पति का मिथुन राशि में गोचर:
तिथि और समयबृहस्पति एक राशि में 13 महीने तक रहते हैं और इसके बाद दूसरी राशि में प्रवेश कर जाते हैं। मिथुन राशि के स्वामी बुध हैं जिनकी बृहस्पति से शत्रुता का भाव रहता है। ऐसे में बृहस्पति का मिथुन राशि में प्रवेश कहीं सकारात्मक तो कहीं नकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकता है।
● क्या है ग्रह की अतिचारी चाल
डॉ. मिश्र के अनुसार जब कोई ग्रह असामान्य गति से एक राशि को अति अल्प समय में पार कर अगली राशि में प्रवेश करे और फिर वक्र गति से पुनः पिछली राशि में लौटे और फिर मार्गी होकर पुनः अगली राशि में चला जाए, ऐसी ग्रह की चाल अतिचारी कहलाती है। देवगुरु बृहस्पति एक राशि में 12 से 13 महीने गोचर करता है, इस प्रकार बृहस्पति लगभग बारह वर्ष में बारह राशियों का भ्रमण पूर्ण करता है।
अतिचारी गति के कारण लगभग पांच महीने के अल्प समय में 18 अक्टूबर को बृहस्पति कर्क राशि में रात्रि 7:46 बजे प्रवेश कर जाएंगे। 11 नवंबर को बृहस्पति वक्री अवस्था में 5 दिसंबर 2025 को पुनः मिथुन राशि में प्रवेश कर जाएंगे। 11 मार्च 2026 तक गुरु वक्री रहेंगे, जून 2026 में गुरु कर्क राशि में प्रवेश करेंगे।
फलित ज्योतिष के अनुसार ज्ञान देने वाला गुरु जब अतिचारी हो जाए तो यह स्थिति वैश्विक असंतोष, युद्ध, तनाव, वर्चस्व की लड़ाई और बौद्धिक संपदा में वृद्धि का संकेत देती है। ऐसा भी कहा जाता है कि अतिचारी गुरु के काल में ही महाभारत का महायुद्ध हुआ था।


