विश्व का एकमात्र ‘शेषशायी श्री विष्णु मंदिर’।

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● श्री नारायण भक्ति पंथ का धार्मिक उपक्रम दर्शन मात्र से मिलेगी सुख समृद्धि : पूज्य लोकेशानंद

वरिष्ठ संवाददाता/ मुंबई वार्ता

श्री नारायण भक्ति पंथ की स्थापना करने वाले पूज्य सद्गुरु लोकेशानंद महाराज इन दिनों मुंबई यात्रा पर हैं। सांताक्रुज पूर्व स्थित होटल ताज में श्रद्धालुओं और अनुयायियों से संवाद साधने के दौरान उन्होंने से मुंबई वार्ता से खास बातचीत में पंथ की स्थापना के उद्देश्य पर विस्तृत चर्चा की।

महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले के शहादा में निर्माणाधीन शेषशायी श्री विष्णु मंदिर को उन्होंने विश्व का एकमात्र श्री विष्णु मंदिर बताया जिसमें भगवान श्री हरि विष्णु शेष सैय्या पर विश्राम की मुद्रा में विराजमान हैं। हालांकि मंदिर का निर्माण कार्य अभी भी जारी है लेकिन तकनीकी कारणों से यहां मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा एक समारोह में की जा चुकी है।

मध्य प्रदेश के इंदौर के मूल निवासी पूज्य लोकेशानंद महाराज ने बताया कि महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में स्थित शहादा तहसील में निर्माणाधीन मंदिर में शेषशायी नारायण की मूर्ति ठोस पंचधातु से निर्मित है। यह श्री मूर्ति 11 फीट लंबी है जिसका वजन 21 टन है जो विश्व कीर्तिमान हो सकता है। यह विश्व का पहला श्री विग्रह है। दो लाख वर्ग फ़ीट क्षेत्र में मंदिर का निर्माण किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि मंदिर के निर्माण में लोहे का उपयोग नहीं होगा। पूरा मंदिर पत्थर से निर्मित हो रहा है। इसमें लगभग 15 हजार टन पत्थर का उपयोग किया जाएगा। मूर्ति सहित मंदिर के निर्माण में 60 करोड़ खर्च होंगे।

भक्तों द्वारा लक्ष्मीपति श्री नारायण की सेवा तन-मन और धन से अर्पण की जा रही है। शांतिलाल पाटिल (काका) और मीना काकी के संचालन एवं रामेश्वर (संत जी) व निकिता दीदी के निर्देशन में यह संकल्प साकार हो रहा है। श्री नारायण भक्ति पंथ का उद्देश्य स्वामी लोकेशानंद महाराज ने बताया कि 1 लाख घरों पर विष्णु भगवान की स्थापना पंथ के माध्यम से करने का संकल्प है।

व्यसन मुक्ति संकल्प पत्र भरना, व्यसन से होने वाली हानि से लोगों को परिचित कराना। समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाना एवं योग शिविर आयोजित करना।समाज में शांति का संदेश देना, ऐसी शिक्षा देना, मानसिक शांति के उपाय बताना है। प्राकृतिक जल और वर्षा जल के संरक्षण के लिए प्रेरित करना।संस्था द्वारा गौ संरक्षण का कार्य करना एवं गौ हत्या को रोकने के लिए प्रयास करना, जो गाय पॉलीथिन खा लेती हैं उन्हें बचाने का प्रयास करना है।

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