■ अगर कुछ भवन निर्माताओं ने अवैध रूप से निर्माण किया है, तो उनका दोष निर्दोष नागरिकों पर नहीं जाना चाहिए- गोपाल शेट्टी- पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री को लिखा पत्र।
मुंबई वार्ता संवाददाता

ठाणे,मुम्ब्रा और शिल परिसर की कुछ बहुमंजिला इमारतों को प्रशासन द्वारा अवैध घोषित किये जाने के कारण उसमें रह रहे नागरिकों के सिर पर छत छिन जाने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में भवन निर्माताओं की गलती की सजा इन बेकसूर नागरिकों को मिलने के संभावित खतरे को देखते हुए उत्तर मुम्बई के पूर्व सांसद गोपाल शेट्टी ने जनहित में मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़वणीस तथा उप-मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर उनका ध्यान इस विषय पर आकृष्ट किया है।


जनसेवक गोपाल शेट्टी ने पत्र में लिखा है कि मुंब्रा-शिल परिसर में स्थित बहुमंजिला इमारतों में जो नागरिक रहते हैं, उन्होंने अपनी मेहनत के पसीने के पैसे गिनकर मकान खरीदे हैं। अगर कुछ भवन निर्माताओं ने अवैध रूप से निर्माण किया है, तो उनका दोष इन निर्दोष नागरिकों पर नहीं जाना चाहिए।
जनसेवक गोपाल शेट्टी के अनुसार मुंब्रा-शिल परिसर में ऐसे अवैध निर्माणवाली इमारतों की उचित जांच करके, उनका नियमन किया जा सकता है। साथ ही ऐसे भवन का अवैध रूप से निर्माण करनेवाले भवन निर्माता व्यवसायिकों को सरकार को उतनी ही जमीन सौंपनी चाहिए और अगर उन्होंने इससे इनकार किया, तो सरकार को उन पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
जनसेवक शेट्टी ने पत्र में आगे लिखा है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी ने “सबको पक्का घर” की संकल्पना देश के सामने रखी है, और महाराष्ट्र ने इस उद्देश्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए भी हैं। २०१८ में राज्य सरकार ने विधानसभा में एक कानून पारित किया, और विभिन्न समय पर शासन निर्णय के माध्यम से सरकारी जमीन पर घर निर्माण के संदर्भ में नियमन के लिए निर्णय भी लिए गए।विशेष रूप से, १७ नवम्बर २०१८ को मुंबई को छोड़कर शेष महाराष्ट्र के लिए जारी किया गया शासन निर्णय ऐतिहासिक रहा है। इसमें १५०० वर्ग फुट तक के निर्माण के नियमन की व्यवस्था है। जिसमें ५०० वर्ग फुट तक कोई शुल्क नहीं है, और ५०१ से १५०० वर्ग फुट तक के निर्माण के लिए शासन द्वारा निर्धारित दर के अनुसार शुल्क देना होगा, ऐसा स्पष्ट किया गया है।
जनसेवक शेट्टी के अनुसार महाराष्ट्र एक कानून का पालन करने वाला राज्य है, और हम सभी न्यायालय का सम्मान करते हैं। तथापि, कई बार न्यायालय भी वास्तविक स्थिति का विचार करके निर्णय लेता है। इसका एक उदाहरण है कांदिवली में एक तालाब के संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के उपरांत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह आदेशित करना कि तालाब पर हुए निर्माण की यथास्थिति बनाये रखते हुए अन्यत्र स्थान पर तालाब का विकास किया जा सकता है। इससे सार्वजनिक निधि का अपव्यय रुकता है और नागरिक सुविधाएं भी बढ़ती हैं।
पत्र के अंत में जनसेवक गोपाल शेट्टी ने मांग रखते हुए कहा है किइस विषय पर एक ‘सर्वपक्षीय समिति’ की स्थापना हो, और नागरिक भी आवश्यकतानुसार आर्थिक सहयोग करने की तैयारी दिखाएं। अगर हम इसे न्याय्य और कानूनी रूप देने का प्रयास करें, तो निश्चित रूप से यह संभव हो सकता है। मेरी विनती है कि आप इस मामले पर गंभीरता से विचार करें और इस पर उचित निर्णय लें। अगर आवश्यकता हो, तो कृपया इस विषय पर एक संयुक्त बैठक आयोजित करें और अगर मुझे भी उस बैठक में आमंत्रित किया गया तो मैं खुशी से उपस्थित रहूंगा।


