आपातकाल को आरएसएस प्रमुख बालासाहेब देवरस का समर्थन, भाजपा को देवरस की भूमिका स्वीकार नहीं? : हर्षवर्धन सपकाल।

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■ इंदिरा गांधी का आपातकाल का निर्णय संविधानिक था, लेकिन पिछले 11 वर्षों से जारी अघोषित आपातकाल पर क्या कहेगी भाजपा?

■ सरकारी विज्ञापन में राजमुद्रा हटाकर सेंगोल छापना — यह संविधान बदलने की साजिश का हिस्सा!

■ मतदान घोटाले की उच्चस्तरीय जांच हो और जांच पूरी होने तक फडणवीस को पद से हटना चाहिए।

मुंबई वार्ता संवाददाता

देश की तत्कालीन परिस्थितियों के कारण इंदिरा गांधी को आपातकाल का निर्णय लेना पड़ा था। उस समय हुई कुछ घटनाओं की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने स्वीकारी है, लेकिन भाजपा आज भी आपातकाल पर केवल ढकोसला करती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बालासाहेब देवरस ने आपातकाल का समर्थन किया था और यह भी स्पष्ट किया था कि जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से आरएसएस का कोई संबंध नहीं था। तो क्या भाजपा को बालासाहेब देवरस की भूमिका स्वीकार नहीं है? यह सवाल महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने उठाया है।

तिलक भवन में आयोजित पत्रकार परिषद में बोलते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 1975 में आपातकाल का जो निर्णय लिया था, वह संविधानिक था। उस समय कुछ ताकतें देश में अराजकता फैलाना चाहती थीं। बाद में आपातकाल हटाकर चुनाव करवाए गए और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान देश की संपत्ति नहीं बेची, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ उद्योगपतियों को नहीं सौंपीं। लेकिन पिछले 11 वर्षों से देश में एक अघोषित आपातकाल चल रहा है।

उन्होंने कहा कि हवाई अड्डे, बंदरगाह, खदानें, बैंक, सरकारी जमीनें चहेते उद्योगपतियों को बेची जा रही हैं। धारावी की जमीन बेची गई है। आज देश में तानाशाही है और भाजपा का यह ‘भस्मासुर’ लोकतंत्र को निगलने को तैयार है।सरकारी विज्ञापन में राजमुद्रा गायब, सेंगोल क्यों?भाजपा सरकार ने आपातकाल की सालगिरह के मौके पर करोड़ों रुपये फूंकते हुए भव्य विज्ञापन जारी किए हैं। इन विज्ञापनों में भारत सरकार की राजमुद्रा गायब कर दी गई है और उसकी जगह सेंगोल दिखाया गया है। सेंगोल किसका प्रतीक है, यह अलग से बताने की जरूरत नहीं है। भाजपा लोकतंत्र और संविधान खत्म कर गोलवलकर की ‘बंच ऑफ थॉट्स’ को लागू करना चाहती है।

हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि कांग्रेस के मुखपत्र ‘जनमानसाची शिदोरी’ मासिक पत्रिका का आपातकाल विशेषांक प्रकाशित किया गया है। इस अंक में इंदिरा गांधी, पुपुल जयकर, वरिष्ठ पत्रकार कुमार केतकर, ‘सामना’ के संपादक और सांसद संजय राऊत सहित कई प्रतिष्ठित लेखकों के लेख शामिल हैं। यह विशेषांक आपातकाल से जुड़ी सच्चाई को जनता के सामने लाएगा और भाजपा के झूठे प्रचार का करारा जवाब देगा

कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि मतदान घोटाले की उच्चस्तरीय जांच होलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने विधानसभा चुनावों में हुई मतदाता सूची में धांधली को लेकर ट्वीट किया है। आरटीआई के जरिए यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्वाचन क्षेत्र में 8% मतदाताओं की अचानक वृद्धि हुई है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रफुल्ल गुडदे पाटील ने यह जानकारी आरटीआई से प्राप्त की है। यह भी उजागर हुआ है कि कई मतदाताओं का नाम एक ही मोबाइल नंबर से दर्ज किया गया है। चुनाव आयोग ने इसकी जांच करने को कहा था, लेकिन अब तक कोई जांच नहीं हुई है। गुडदे पाटील ने इस पर दो याचिकाएं अदालत में भी दाखिल की हैं। लेकिन फडणवीस ने अब तक इन सवालों के जवाब नहीं दिए हैं। इस मतदाता घोटाले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और जांच पूरी होने तक फडणवीस को पद से हट जाना चाहिए।

■ चांदी की थाली में मेज़बानी!

संसद और विधानसभा की अनुमान समिति के सदस्यों ने धुले के विश्रामगृह के कमरा नंबर 102 में पाँच हज़ार रुपये की शाही दावत खाई, जिसमें 550 रुपये किराए की चांदी की थाली का इस्तेमाल हुआ। यह पैसा अनुमान समिति के बजट से खर्च किया गया था क्या? यह पूछते हुए सपकाल ने कहा कि यह समिति के नाटक का दूसरा भाग है। शाही भोजन के बाद अब वे देश को बताएंगे कि कैसे बचत करनी चाहिए। किसानों की कर्जमाफी के लिए, बहनों को 2100 रुपये देने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं, लेकिन मेहमानों की दावत के लिए जरूर पैसे हैं — यह सरकार का असली चेहरा है, ऐसा हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।

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