■ गलत तरीके से बायपैप मशीन चलाने से मरीज का फेफड़ा हुआ खराब ।
■ जसलोक अस्पताल पर और उनके द्वारा आउटसोर्स नर्स पर लापरवाही का लगा आरोप ।
मुंबई वार्ता संवाददाता

मरीज़ सम्राट मोरे के भाई सागर मोरे ने जसलोक अस्पताल और उनके द्वारा आउटसोर्स किए गए नर्सिंग सर्विस पर इलाज के दौरान लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। सागर मोरे द्वारा पुलिस में की गई शिकायत के अनुसार नर्स द्वारा गलत तरीके से बायपैप मशीन चलाने के कारण सम्राट मोरे को एक तरफ का फेफड़ा ही गंवाना पड़ गया। पुलिस ने जेजे अस्पताल की जांच कमिटी के पास सारे दस्तावेज भेज दिए हैं। कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।


अंधेरी पूर्व रहवासी सागर भगवान मोरे ने बताया कि बड़े भाई सम्राट मोरे (45 वर्ष) को फेफड़ों में फंगल इन्फेक्शन की शिकायत होने के बाद इलाज के लिए जसलोक अस्पताल में भर्ती किया था। 15 मार्च 2025 को उनका पहला ऑपरेशन हुआ था। ऑपरेशन के बाद 2 अप्रैल तक उन्हें आईसीयू में रखा गया और फिर जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया।


अस्पताल प्रशासन ने मरीज़ की 24 घंटे देख रेख के लिए एक निजी नर्सिंग एजेंसी “क्रिटिकल केयर यूनिफाइड प्रा. लि.” से नर्सिंग स्टाफ की सेवा ली गई। 10 अप्रैल की रात लगभग 9:30 बजे, नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही से बायपैप मशीन को गलत तरीके से ऑपरेट किया गया। इससे सम्राट के फेफड़ों में हवा भर गई, ऑपरेशन के टांके खुल गए और स्थिति गंभीर हो गई। उन्हें तत्काल ICU में दोबारा भर्ती करना पड़ा। डॉक्टरों से जब इस घटना की लिखित रिपोर्ट मांगी गई तो उन्होंने रिपोर्ट देने से मना कर दिया और कहा कि वे मुआवजा देने को तैयार हैं, बशर्ते पुलिस में शिकायत न की जाए। स्थिति और बिगड़ने पर 2 मई को सम्राट का दूसरा ऑपरेशन करना पड़ा, जिसमें उनका दाहिना फेफड़ा पूरी तरह निकाल दिया गया।
सागर मोरे ने कहा कि, “हमने इलाज के लिए 30 लाख रूपये भी भरे। उन्होंने मुझसे सारे डॉक्यूमेंट लिए और कहा कि आरोपों की जांच जेजे अस्पताल के डॉक्टरों की कमिटी द्वारा की जाएगी। इसी बीच भाई की तबियत खराब हुई क्योंकि उसके फेफड़े में एयर लीक हो रहा था और 22 जून को हमने उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मेरे भाई का फेफड़ा ठीक करने के लिए गए थे, लेकिन जसलोक अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग स्टाफ व डॉक्टरों की लापरवाही के कारण मेरे भाई की यह हालत हुई है। मेरी मांग है कि इसकी निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।”
इसी मांग को लेकर सागर मोरे ने अस्पताल के बाहर अपना विरोध प्रगट किया है। इस संदर्भ में जसलोक अस्पताल की ओर से बयान जारी किया गया है, जिसमें कहा गया है कि जसलोक अस्पताल में मरीज की सुरक्षा, चिकित्सकीय पारदर्शिता और नैतिक चिकित्सा पद्धतियां हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। इस कठिन समय में हम सम्राट मोरे के परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं।सम्राट मोरे को अस्पताल में गंभीर और तेजी से फैलने वाले फंगल इन्फेक्शन एस्परजिलस फ्यूमिगेटस और एस्परजिलस फ्लेवस संक्रमण के कारण भर्ती किया गया था। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अत्यंत कम होने के साथ-साथ उन्हें पहले से ही गंभीर एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस था, जिससे यह संक्रमण और अधिक तेजी से बढ़ा।जीवन रक्षक उपायों के रूप में, उनकी एक फेफड़े की सर्जरी की गई, जिसमें फेफड़े का एक भाग निकालना पड़ा। यह ऑपरेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। हालांकि, संक्रमण ने शेष दाहिने फेफड़े को भी प्रभावित किया। परिवार से विस्तृत चर्चा के बाद एक अत्यंत जटिल और दुर्लभ सर्जरी कंप्लीशन न्यूमोनेक्टॉमी विद विंडो थोराकोस्टॉमी की गई। यह एक उच्च जोखिम वाली सर्जरी है जिसे केवल कुछ ही विशेषज्ञ डॉक्टर करते हैं। सम्राट की हालत स्थिर होने पर, सभी निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए, उन्हें 28 मई 2025 को जसलोक हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई थी। बाद में हमें यह जानकारी मिली कि उनकी मृत्यु 22 जून को एक अन्य अस्पताल में हुई। उनकी मृत्यु का कारण हमारे संज्ञान में नहीं है। जसलोक हॉस्पिटल सभी चिकित्सकीय, नियामकीय और कानूनी मानकों का पूर्ण पालन करता है।
गामदेवी पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि मामला जेजे अस्पताल की कमिटी के समक्ष रखा गया है उनकी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।


