मुख्यमंत्री फडणवीस ही विधानसभा लॉबी में हुई हिंसा के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं; उन्हें प्रायश्चित स्वरूप इस्तीफा देना चाहिए: हर्षवर्धन सपकाल।

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■ भाजपा ने जैसा बोया वैसा ही काटा; विरोधियों पर हमला करने के लिए भाजपा ने गुंडों और मवालियों को पाल-पोस कर बढ़ावा दिया।

■ विधानसभा सत्र में किसानों, श्रमिकों, महिलाओं और बेरोजगारों के मुद्दों पर सरकारने चर्चा नहीं की।

■ हनीट्रैप के तार समृद्धि महामार्ग के भ्रष्टाचार तक जुड़े हुए हैं, इसलिए सरकार जांच करने से कतरा रही है।

मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र विधानसभा के सत्र ने जनता को क्या दिया? तो इसका जवाब कुछ नहीं यही है । राज्य में अपराध बढ़ते जा रहे हैं, महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, ड्रग्स का जाल तेजी से फैल रहा है। किसानों को न नुकसान भरपाई मिली, न कर्जमाफी, न फसल बीमा का लाभ और न ही बेरोजगारों के मुद्दों पर कोई चर्चा हुई, न कोई निर्णय लिया गया। यह सत्र केवल एक ही वजह से याद रखा जाएगा – और वह है विधानसभा भवन में हुई हिंसक झड़प। सड़क के गुंडे-मवाली अब सीधे विधानसभा में प्रवेश कर चुके हैं और इसके लिए केवल और केवल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ही जिम्मेदार हैं। यह गंभीर आरोप लगाते हुए महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मांग की है कि फडणवीस को प्रायश्चित के तौर पर इस्तीफा देना चाहिए।

तिलक भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सपकाल ने कहा कि जनता अपने प्रतिनिधियों को विधानसभा या संसद में इसलिए भेजती है कि वे उनके सवालों को उठाएं और हल करें। लेकिन अब तस्वीर बदलती जा रही है। महाराष्ट्र की जनता ने इस बार विधानसभा में जो दृश्य देखा वह पहले कभी नहीं हुआ। जो कल तक सड़कों पर होता था, वह आज लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर में हुआ। यह घटना किसी WWF की लड़ाई जैसी लगी। इसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है। लेकिन इस हिंसा के लिए राज्य के मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं। भाजपा ने जानबूझकर इस नई राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया है।

अक्कलकोट में प्रवीण गायकवाड पर हमला करने वाले मकोका के आरोपी को भाजपा नेताओं ने ही कहा – “भिऊ नकोस, मुख्यमंत्री तुझ्या पाठीशी आहेत” (मत डर, मुख्यमंत्री तुम्हारे साथ हैं)। विधायक निवास की कैंटीन में भी एक विधायक ने WWF की तरह मारपीट की। ‘आका’, ‘कोयता’ गैंग अब पुराने हो गए हैं। भाजपा अब खुद अपने बोए हुए बीज काट रही है। मुख्यमंत्री खुद कहते हैं कि “अब तो विधायकोंको लोग मवाली कहलाने लगे हैं।”

सपकाल ने कहा कि यही भाजपा की फसल है, और अब यह सड़ चुकी है।महाराष्ट्र विधानसभा में जो कुछ हुआ है, उसने जनता को बेहद आक्रोशित कर दिया है। लेकिन सत्ता की कुर्सी पर बैठे ये बिच्छू हैं, जिन्हें कुचलना संभव नहीं रहा। भाजपा ने लोकतंत्र को रसातल में पहुंचा दिया है। भाजपा न तो लोकतंत्र मानती है और न ही संविधान, लेकिन कम से कम महाराष्ट्र की संस्कृति और परंपरा को नष्ट करने का पाप न करें। जनता अब चुप नहीं बैठेगी और इसका जवाब जरूर देगी, ऐसा तीखा इशारा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने किया।

हनीट्रैप के तार समृद्धि महामार्ग के भ्रष्टाचार तक…राज्य के कुछ अधिकारी और मंत्री हनीट्रैप के जाल में फंसे हुए हैं, यह एक सच्चाई है। भले ही मुख्यमंत्री इन घटनाओं को नकारते रहें, लेकिन वे हमेशा की तरह झूठ ही बोल रहे हैं। इस हनीट्रैप के तार समृद्धि महामार्ग में हुए लगभग 20,000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार तक जुड़े हुए हैं। इस घोटाले को उजागर होने से रोकने के लिए ही यह दबाया जा रहा है। फडणवीस जो कह रहे हैं, वह सरासर झूठ है, ऐसा स्पष्ट आरोप सपकाल ने लगाया।

जन सुरक्षा कानून पर कांग्रेस का विरोध…जन सुरक्षा कानून पर बात करते हुए कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस ने शुरू से ही इस कानून पर आपत्ति जताई है और इसका विरोध किया है। इस विधेयक के लिए गठित समिति में भी कांग्रेस ने कई आपत्तियां दर्ज की हैं। समिति में यह सवाल भी उठाया गया था कि बजरंग दल, आरएसएस जैसी संगठनें क्या इस कानून के दायरे में आएंगी? लेकिन इस पर उपमुख्यमंत्री अजित पवार चुप हैं। कांग्रेस इस विधेयक का विरोध करती है और विधानसभा के अंदर और बाहर हर जगह करती रहेगी, ऐसा सपकाळ ने दृढ़तापूर्वक कहा।

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