मुंबई में कबूतरों को दाना-पानी देने हेतु चबूतरा बनाने हेतु सुझाव एवं उपाय संबंधी दिया गया ज्ञापन।

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मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई महानगरपालिका द्वारा हाल ही में कबूतरखानों पर कबूतरों को दाना-पानी देने की गतिविधि पर रोक लगाने के कारण, शहर में कबूतरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यावश्यक हो गया है। जब तक कोई उपयुक्त वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक हम सभी पक्षी प्रेमी नागरिकों से विनम्र अपील करते हैं कि वे अपने-अपने भवनों की छतों पर कबूतरों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करें। इस प्रकार का आव्हाहन मुंबई के पूर्व उपमहापौर बाबू भाई भवानजी ने नागरिकों से किया है और संबंधित ज्ञापन मुंबई महानगर पालिका स्वास्थ्य विभाग को दिया है।

ज्ञापन के अनुसार माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में, आवासीय क्षेत्रों में स्थित कबूतरखानों को बंद किए जाने से लाखों कबूतरों का जीवन संकट में पड़ गया है। इससे पशु-प्रेमियों एवं संवेदनशील नागरिकों में गहरी चिंता उत्पन्न हुई है। इस परिस्थिति में विभिन्न समुदायों और धर्मों के लोग, विशेष रूप से धार्मिक सनातनी जन, इन पक्षियों की रक्षा हेतु एकजुट हुए हैं। चिड़िया को दाना, कुत्तों को रोटी , जानवरों को चारा एवं अन्य जीव-जंतुओं को भोजन कराना भारतीय परंपरा में “जीयो और जीने दो” के सिद्धांत पर आधारित है, और इसे एक नैतिक व आध्यात्मिक उत्तरदायित्व माना जाता है। प्रत्येक जीव को जीवन जीने का अधिकार है, और दूसरों की सहायता करना हमारे सांस्कृतिक मूल्यों एवं मानवीयता का प्रतीक है।

इस सन्दर्भ में ज्ञापन के माध्यम से निम्नलिखित सुझाव प्रस्तुत करते हैं:

1). मुंबई के समुद्रतट क्षेत्र जैसे कोलाबा, नरिमन पॉइंट, गिरगांव, मलबार हिल, हाजी अली, वर्ली, दादर, माहिम, बांद्रा, जुहू, अंधेरी से दहिसर, भाऊचा ढक्का, रिया रोड, वडाला, ट्रॉम्बे से वाशी तक सुनियोजित कबूतर आश्रय (चबूतरे) बनाए जाएं.

2.) रेसकोर्स मैदान, ईस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे (घाटकोपर से मुलुंड – गोडरेज), संजय गांधी नेशनल पार्क, आरे कॉलोनी, पवई आदि क्षेत्रों में भी कबूतर आश्रय बनाए जाएं।

3) जब तक नए आश्रय स्थल तैयार नहीं होते,तब तक वर्तमान कबूतरखानों में प्रत्येक दिन दोपहर 2:00 बजे से 4:30 बजे तक अस्थायी रूप से दाना-पानी देने की अनुमति दी जाए।

4) रेसकोर्स मैदान, नेशनल पार्क, और पवई के जंगल क्षेत्र में पक्षी प्रेमियों को कबूतरों को दाना खिलाने की अनुमति दी जाए, क्योंकि इससे किसी को असुविधा नहीं होगी।

5). धार्मिक स्थलों व मंदिरों की छतों पर कबूतरों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करने की अनुमति दी जाए, जहां ये पक्षी शरण पाते हैं।

ज्ञापन के माध्यम से बताया गया है दादर कबूतरखाना जो ब्रिटिश काल से एक विरासतीय स्थल है, उसे मुंबई की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में सुरक्षित रखा जाए और उसका उचित रख-रखाव किया जाए। हम माननीय न्यायालय के आदेशों का पूर्ण सम्मान करते हैं, परंतु उनका कार्यान्वयन इस प्रकार न हो कि निर्दोष पक्षियों की मृत्यु हो या पीड़ा हो, जो कि अन्यायपूर्ण और अमानवीय होगा। अतःहम मुंबई महानगरपालिका तथा महाराष्ट्र सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि वे इस विषय पर संवेदनशीलता और गंभीरता से ध्यान दें, आवश्यक कार्यवाही करें तथा अब तक किए गए उपायों की जानकारी दें।

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