■ पुलिस ने 300 करोड़ रुपये फ्रीज करने में सफलता पाई।
मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

साइबर अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं और पिछले 3 वर्षों में साइबर पुलिस हेल्पलाइन १९३० पर १३ लाख से ज़्यादा धोखाधड़ी के कॉल आए हैं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ३०० करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की रकम फ्रीज करने में सफलता पाई है। इसके अलावा, पुलिस ने ११,००० साइबर अपराधियों के फ़ोन भी ब्लॉक कर दिए हैं।


पिछले कुछ वर्षों में साइबर अपराधी सक्रिय हो गए हैं। हर किसी के हाथ में स्मार्ट फ़ोन है और ज़्यादातर लेन-देन ऑनलाइन होते हैं। इसका फ़ायदा उठाकर साइबर अपराधी नागरिकों को तरह-तरह से ठग रहे हैं। धोखाधड़ी का शिकार होने के बाद शिकायतकर्ता को पुलिस स्टेशन पहुंचने में समय लगता है और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। इसके लिए मुंबई क्राइम ब्रांच ने हेल्पलाइन 1930 शुरू की है। इस हेल्पलाइन पर दिन-प्रतिदिन बड़ी संख्या में शिकायतें आ रही हैं। यह हेल्पलाइन १७ मई २०२२ को शुरू की गई थी।
१७ मई २०२२ से २१ अगस्त २०२५ तक की ३ साल की अवधि के दौरान इस साइबर हेल्पलाइन पर कुल १३ लाख १९ हजार ४०३ कॉल आए। इसमें मुख्य रूप से शेयर ट्रेडिंग, निवेश, डिजिटल गिरफ्तारी, ऑनलाइन कार्य, ऑनलाइन शॉपिंग, लोन दिलाने, नौकरी दिलाने का वादा करके लोगों को लुभाने में धोखाधड़ी की शिकायतें शामिल हैं। उन शिकायतों में से साइबर धोखाधड़ी की १ लाख ३१ हजार शिकायतें एनसीआरपी पोर्टल (राष्ट्रीय साइबर अपराध) पर दर्ज की गईं।
इस हेल्पलाइन पर नागरिकों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद, एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज की जाती है। शिकायत प्राप्त होते ही अधिकारी और कर्मचारी संबंधित बैंकों, वॉलेट्स, व्यापारियों आदि के नोडल अधिकारियों से समन्वय कर अनुवर्ती कार्रवाई करते हैं। नागरिकों द्वारा ठगी गई राशि पर तुरंत कार्रवाई की जाती है और संबंधित बैंक खातों में जमा कर दी जाती है।
साइबर पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हेल्पलाइन शुरू होने के बाद से विभिन्न बैंकों से लगभग 300 करोड़ रुपये जब्त किए जा चुके हैं। इस वर्ष १ मई से २१ अगस्त तक की तीन महीने की अवधि के दौरान ११३ करोड़ ८६ लाख रुपये जब्त किए गए हैं। यह राशि न्यायालय के आदेश के बाद संबंधित शिकायतकर्ताओं को वापस कर दी जाती है।पिछले डेढ़ वर्षों (जनवरी २०२४ से जुलाई २०२५) में पुलिस ने साइबर अपराधियों के ११ हजार ६३ फोन ब्लॉक किए हैं।


