मुंबई वार्ता/हरीशचंद्र पाठक

पवई कला विकास मंडल, की ओर से पिछले ५१ वर्षों से सार्वजनिक गणेशोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ-साथ सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक कार्यों में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। गत वर्ष मनाया गया स्वर्ण महोत्सव मंडल की गौरवशाली परंपरा और समाजसेवा की अखंड धारा का प्रतीक है।


बता दें कि मंडल द्वारा पवई के विद्यालयों में ६०० से अधिक विद्यार्थियों की शिक्षा-शुल्क सहायता, साथ ही रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य परीक्षण, अंगनवाड़ी व समाज कल्याण केंद्र जैसे उपक्रम वंचित समाजघटक के जीवन में आशा, सहारा और सशक्तिकरण का संचार कर रहे हैं।इस वर्ष मंडल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राजदरबार की कलाकृति साकार कर संस्कृति और परंपरा के पुनर्जागरण का संदेश दिया है।


विशेषतः, महाराष्ट्र के बारह गढ़-किलों को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में स्थान मिलने के गौरव के साथ यह कलाकृति समाज को यह प्रेरणा देती है कि जैसे शिवाजी महाराज ने हिंदुत्व की ज्योति प्रज्वलित रखी, वैसे ही आज भी उस चेतना को समाजजीवन में जीवित रखना आवश्यक है।


