■ सुकर्मा योग और रवि योग में होगी बाप्पा की विदाई.
■ जगत के पालनहार विष्णु के अनंत रूप की होगी पूजा.
वरिष्ठ संवाददाता /मुंबई वार्ता

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की विनायक गणेश चतुर्थी से प्रारंभ हुआ गणेशोत्सव शनिवार 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर बाप्पा की विदाई के साथ पूर्ण हो जाएगा। अनंत चतुर्दशी पर जहां गणेश मूर्ति का विसर्जन किया जाता है, वहीं भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा का विधान भी है। भगवान विष्णु के सेवक भगवान शेषनाग का नाम अनंत है।


ज्योतिषाचार्य डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि अग्नि पुराण में अनंत चतुर्दशी व्रत के महत्व का वर्णन मिलता है। श्रीकृष्ण ने भी पांडवों को अनंत चतुर्दशी का महत्व बताया था। चतुर्मास में श्री हरि विष्णु शेष शैय्या पर अनंत योगनिद्रा में शयन करते हैं। अनंत भगवान ने ही वामन अवतार में दो पग में ही तीनों लोकों को नाप लिया था। इनके न तो आदि का पता है न अंत का इसलिए यह अनंत कहलाते हैं।- अनंत संसार महासुमद्रे मग्रं समभ्युद्धर वासुदेव।अनंतरूपे विनियोजयस्व ह्रानंतसूत्राय नमो नमस्ते।।


डॉ. अशोक मिश्र ने बताया कि अनंत चतुर्दशी के दिन सुकर्मा और रवि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इन योगों में भगवान गणेश और विष्णु की पूजा करने से अनंत गुना शुभ फल प्राप्त होंगे। पंचांग के अनुसार शनिवार 6 सितंबर को सुबह 3:12 बजे भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत होगी। 7 सितंबर को देर रात 1:41 बजे अनंत चतुर्दशी का समापन होगा। इस प्रकार उदया तिथि के आधार पर शनिवार 6 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी।शुभ योगों का निर्माण अनंत चतुर्दशी पर सुकर्मा योग का संयोग दिन में 11:52 बजे से बन रहा है। इसके साथ ही रवि योग का भी निर्माण सुबह 6:02 बजे से देर रात 10:55 बजे तक है। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अनंत चतुर्दशी पर धनिष्ठा नक्षत्र का भी संयोग है।
धनिष्ठा नक्षत्र देर रात 10:55 बजे तक है। इसके साथ ही गर एवं वणिज करण के योग हैं। साल की 6 अनंत चतुर्दशी महत्वपूर्ण वैदिक पंचांग के अनुसार सभी चतुर्दशियों में से 6 चतुर्दशी का खास महत्व बताया गया है। इसमें भाद्रपद शुक्ल की अनंत चतुर्दशी, कार्तिक कृष्ण की कृष्ण, रूप या नरक चतुर्दशी, कार्तिक शुक्ल की बैकुंठ चतुर्दशी, वैशाख शुक्ल माह की विनायक चतुर्दशी, फाल्गुन मास की चतुर्दशी (महाशिवरात्रि) और श्रावण मास की चतुर्दशी (शिवरात्रि) का खासा महत्व है।अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बंधन अनंत चतुर्दशी के इस व्रत में भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा के बाद बाजू (बांह) पर अनंत सूत्र बांधा जाता है जिसका रक्षाबंधन की तरह विशेष महत्व होता है।
इस दिन कच्चे धागे से बने 14 गांठ वाले धागे को बाजू में बांधने से भगवान विष्णु की अनंत कृपा प्राप्त होती है। इस धागे को बांधने की विधि और नियम का पुराणों में उल्लेख मिलता है। अनंत सूत्र को पुरुषों को दाएं और महिलाओं को बाएं बाजू में बांधना चाहिए।


