धीरज फूलमती सिंह/स्तंभकार/मुंबई वार्ता

रामायण का एक बडा ही रोचक प्रसंग याद आता है, जब रावण ने हनुमान जी को रोकने के लिए छल का सहारा लिया और एक राक्षस को साधु के वेश में भेजा,उस असुर का नाम कालनेमि था। कालनेमि लंका नरेश रावण के मामा मारीच का पुत्र था।


रामायण के युद्ध में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर सुषेण वैद्य द्वारा संजीवनी बूटी लाने की बात आई तो रावण ने कालनेमि को हनुमान का रास्ता रोकने का काम सौंपा। कालनेमि ने एक मायावी साधु का वेश धारण किया और हनुमान जी को रोक लिया,लेकिन हनुमान जी ने उसकी माया को पहचानकर उसका वध कर दिया।
इसी पौराणिक कथा से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड पुलिस ने अपने विशेष अभियान का नाम ‘ऑपरेशन कालनेमि ’ रखा है।
उत्तराखंड में चलाया जा रहा कालनेमि ऑपरेशन लोगों की आस्था की रक्षा करने और यह सुनिश्चित करने का एक प्रयास है। इस आप्रेशन में लगभग 300 की संख्या से अधिक छद्म साधु और मौलाना पकडे गए है। इन साधु-संतों में अधिकांश तो मुस्लिम पक्ष के व्यक्ति है।


हम सभी ने अपने बाल्यकाल में यह बात जरूरी सुनी होती थी कि कुछ इलाकों में बच्चा चोर गैग की सरगर्मी बढ गई है और ये सभी बच्चा चोर गैग के सदस्य साधु के भेष में रहते है और एकांत में मौका पा कर छोटे बच्चो को दबोच बोरी में भर कर चल देते है।
आज भी अधिकतर झुग्गी झोपडी और गरीब बस्तियों में आये दिन ऐसे समाचार देखने सुनने के लिए मिल जाते है कि फंला जगह साधु के भेष में आये कुछ लोग बच्चा उठा कर ले गए। आप ने कभी जानने की कोशिश की कि सिर्फ साधु के भेष में ही क्यो,ऐसे वारदात अंजाम दिये जाते है ?
साधु हिंदू धार्मिक समाज का वह घटक होता है, जिसपर आसानी से भरोसा जम जाता है। उसपर अपने आप श्रद्धा बन जाती है,उसे बडे सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। ऐसे में साधु का भेष धरा व्यक्ति आसानी से लोगों को अंधविश्वास,छल-कपट और दैवीय शक्तियों के झूठे दावों के ज़रिए लोगों की आस्था का फायदा उठा सकता है।
आप को यह जरूर जानना चाहिए कि रावण का वध भगवान श्रीराम ने सिर्फ इसलिए नही किया गया था, कि उसने माँ सीता का छल से अपहरण किया था बल्कि उसके वध के मूल में यह बात थी कि उसने माँ सीता का अपहरण करने के लिए एक ऋषि/ साधु का वेष धरा था जो महापाप की श्रेणी में आता है, सनातन में यह अक्षम अपराध है।
अभी हाल ही में गाजियाबाद में अफसर और नावेद नाम के दो लोगो को गिरफ्तार किया गया है जो कई मासूम बच्चो के अपहरण में शामिल थे। ये लोग गोरे चिट्टे अबोध बच्चो का अपहरण कर उचें दामों में बेच देते थे,साँवले और काले बच्चो के लिए इनको बहुत कम पैसे मिलते थे। साँवले और काले बच्चो को जबरदस्ती अपाहिज बना कर भीख मांगने के धंधे में लगा दिया जाता था,जो थोडे चपल होते थे, उन्हे चोरी चकारी और छीना झपडी का हुनर सीखा कर उनसे मोटी कमाई की जाती थी।
हाल के सालों में देहरादून,जमशेदपुर,कोचीन,चेन्नई, पश्चिम बंगाल, मंदसौर से कई छद्म भेषधारी मौलाना भी गिरफ्तार किये गए है,जो मुस्लिम बहुल इलाकों से मासूम बच्चों का अपहरण करने के बाद बहला फुसलाकर धार्मिक कट्टरवाद की शिक्षा देकर उन्हे आतंकवाद की राह पर ढकेल देते थे। इन्ही बच्चो में से कई तो हमारे आसपास भी स्लीपर सेल बन बडी शांती से टाइम बॉम्ब बनने के इंतजार में घुल-मिल कर हमारे बीच ही रह रहे होंगे!
फतेहपुर,कानपुर,इलाहाबाद,मुंबई में कई नकली मौलाना पकडे गये है जो मदरसे और मस्जिद के नाम पर चंदा वसूलते थे,जब गहराई से छानबीन की गई तो पता चला कि कही कोई मदरसा नही है,कोई मस्जिद नही है।
मुंबई के गोवंडी,भिवंडी,दो टांकी,शिवाजी नगर में ऐसे संदिग्ध लोग पकडे गये है जो साधु या मौलाना के रूप अख्तियार कर चोरी,डकैती करने के लिए इलाके की रेकी करते थे। ऐसे कुछ साधु अभी हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल के कोलकोता और चौबीस परगना जिले में भी धरे गए है। अगस्त के आखिर में दिल्ली में भी तीन छद्म साधु पकडे गये है।
यहां यह बात ध्यान देने की है कि वर्तमान में हमारे समाज में कालनेमि के भेष में घुम रहे लोगो में सिर्फ मुसलमान ही नही कई हिंदू, ईसाई और सिख समुदाय के भी कुछ लोग गिरफ्तार हुए है। जो इस बात को यह साबित करते है कि कालनेमियों का कोई धर्म नही होता क्योंकि कालनेमि एक राक्षस था और राक्षसों का कोई धर्म या मजहब नही होता है।
बहुत से लोग सिर्फ धार्मिक आस्था के आधार पर भगवा धारण करते हैं। उनके पास धर्म का इतना व्यापक ज्ञान भी नहीं होता है। वह जीवन पद्धति के तौर पर इसे स्वीकार करते हैं। कुछ बुजुर्ग एक निश्चित उम्र के बाद साधु-संन्यासी के तौर पर रहना पसंद करते हैं। ऐसे में पुलिस और प्रशासन के सामने असली अनुयायी और छद्म वेशधारियों के बीच अंतर करने की चुनौती तो सदा से ही बनी रही है।


