मुंबई वार्ता संवाददाता

विहंगम योग के आध्यात्मिक संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराज ने कहा है कि यज्ञ में डाली जाने वाली आहुतियां सनातन युग को जीवंत कर देती हैं। उन्होंने कहा कि जब श्रद्धापूर्वक भाव से वैदिक मंत्रों की ध्वनियों के बीच भगवान के नाम से आहुतियां समर्पित होती हैं तो वह क्षण सतयुग का दर्शन कराता है। हमारी संस्कृति का दर्शन कराता है। यह दर्शन ही हमारा प्राण है।


उन्होंने कहा कि मारे गुरुवर, ऋषियों, सनातन संस्कृति, यज्ञ संस्कृति आदि ने सेवा, त्याग और समर्पण सिखाया है। आध्यात्म हमें अपनी पहचान कराता है। हमारी आंतरिक शक्ति का परिचय कराता है। हम आत्मा और उसके बाद परमात्मा की ओर बढ़ते चले जाते हैं। यज्ञ और योग साधना हमारे जीवन को नियमित, अनुशासित और परिपूर्ण बनता है। विहंगम योग संस्थान के युवा संत श्री विज्ञानदेव जी महाराज इन दिनों कश्मीर से कन्याकुमारी तक स्वर्वेद संदेश यात्रा पर निकले हैं। महाराजश्री की यह यात्रा पूरी होने पर 25 और 26 नवंबर को वाराणसी में उमराहा स्थित स्वर्वेद महामंदिर में 25 हजार कुंडीय स्वर्वेद ज्ञान महायज्ञ होगा। विहंगम योग के साधकों का यह 102 वां वार्षिक महायज्ञ है जिसमें शामिल होने के लिए मुंबई से हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने अपना पंजीकरण कराया है।


उल्लेखनीय है कि स्वर्वेद महामंदिर के पहले चरण का उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष किया था। विहंगम योग संस्थान के वर्तमान आचार्य स्वतंत्रदेव जी महाराज अपने गुरु धर्मदेव महाराज एवं विहंगम योग के प्रवर्तक सदाफलदेव जी महाराज की प्रेरणा से यह विशाल मंदिर बनवा रहे हैं। पूर्वांचल में यह अब तक का सबसे ऊंचा और बृहद मंदिर निर्माण प्रक्रिया में है। आज संत प्रवर विज्ञानदेव जी महाराजश्री को सुनने मुंबई, ठाणे, कल्याण, नवी मुंबई व अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का कारवां उमड़ा था। महाराजश्री ने साधकों को योग, प्राणायाम, ध्यान की साधना भी कार्रवाई। महाराजश्री ने बताया कि 26 नवंबर को संविधान दिवस भी मनाया जाएगा। इस अवसर पर स्वर्वेद महामंदिर में श्रद्धालु लाखों दीप प्रज्वलित करके ‘समर्पण दीप आध्यात्मिक महोत्सव’ भी मनाएंगे।
संत विज्ञानदेव जी ने बताया कि कश्मीर में उनके प्रवास के दौरान अनेक मुस्लिम बंधुओ ने वाराणसी पहुंचकर स्वर्वेद महामंदिर के ‘समर्पण दीप आध्यात्मिक महोत्सव’ शामिल होने और दीप प्रज्वलित करने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि यह दीप उत्सव आध्यात्मिक चेतना जगाने, ज्ञान का प्रसार करने और लोगों को जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने धर्म और आध्यात्म का महत्व बताते हुए कहा कि हमारी संस्कृति वेदिक है। गुरुकुल प्रणाली की शिक्षा हमारी युवा पीढ़ी का आधार है। भारतीय संस्कृति में मातृशक्ति को हमेशा पूजा गया है।
उन्होंने याद दिलाया कि आध्यात्मिक और सनातन संस्कृति ने भारत को विश्व गुरु बनाया था। भारत अपनी सनातन संस्कृति और आध्यात्मिकता के कारण ही विश्व गुरु है और आगे भी बना रहेगा। महाराजश्री ने युवाओं को धर्म और आध्यात्मिक का ध्वज लेकर आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।


