■ महायुती सरकार किसानों की आवाज दबाने की कोशिश में, किसी भी हालत में कर्जमाफी होनी ही चाहिए.
मुंबई वार्ता संवाददाता

मतदाता सूचियों में भारी गड़बड़ी है — यह बात सबसे पहले कांग्रेस पार्टी ने सबूतों के साथ उजागर की थी। लेकिन निर्वाचन आयोग ने इसकी गंभीरता से कोई संज्ञान नहीं लिया। इस “सोए हुए निर्वाचन आयोग” को जगाने के लिए सभी दलों ने 1 नवंबर को एक विशाल मोर्चा आयोजित किया है, जिसमें कांग्रेस पार्टी भी शामिल होगी, ऐसा महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया।


इस संदर्भ में बुलढाणा में पत्रकारों से बात करते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि मुंबई में आज 1 नवंबर के मोर्चे के संदर्भ में एक बैठक आयोजित की गई थी, लेकिन कुछ व्यक्तिगत और पारिवारिक कारणों से मैं उस बैठक में उपस्थित नहीं हो सका। फिर भी, कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि उस बैठक में मौजूद थे। 1 तारीख के मोर्चे में भी कांग्रेस पार्टी का पूर्ण सहभाग रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस बैठक या मोर्चे में कौन-कौन शामिल होता है, यह गौण है, मुद्दा महत्वपूर्ण है।बच्चू कडू के आंदोलन पर बोलते हुए हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि सरकार कभी पुलिस को, तो कभी अदालत को आगे कर मुख्य मुद्दे से भागने की कोशिश कर रही है। अदालत को ढाल बनाकर सरकार किसानों की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। अगर सरकार में हिम्मत है, तो उसे सीधे सामने आकर किसानों से बातचीत करनी चाहिए।
चुनाव प्रचार के दौरान किसानों की कर्जमाफी का वादा किया गया था, लेकिन अब उसे लागू करने में टालमटोल क्यों की जा रही है? किसानों का कर्ज माफ होना ही चाहिए।अगर राज्य सरकार के खजाने में पैसे की कमी है, तो यह उसकी अक्षमता का प्रमाण है। अगर मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री में थोड़ी भी राजनीतिक साख है, तो उन्हें दिल्ली जाकर महाराष्ट्र के लिए विशेष आर्थिक पैकेज लाना चाहिए, ऐसा कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा।


