श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

महाराष्ट्र की पारंपरिक हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। Lidcom (लिडकॉम) और Prada के बीच महत्वपूर्ण सहयोग समझौता हुआ है, जिससे कोल्हापुरी चप्पलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।


■ लिडकॉम की अहम भूमिका
लिडकॉम पिछले करीब 50 वर्षों से महाराष्ट्र के चर्मकारों और लेदर कारीगरों के सम्मान, आजीविका और अधिकारों की रक्षा के लिए काम कर रही है।
इस संस्था की स्थापना 1 मई 1974 को सामाजिक न्याय विभाग के तहत की गई थी।
संस्था ने पारंपरिक लेदर कारीगरी को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खासतौर पर, 2009 में कोल्हापुरी चप्पलों को भौगोलिक संकेत (GI टैग) दिलाने में लिडकॉम की बड़ी भूमिका रही है।
■ प्राडा के साथ कैसे शुरू हुआ सहयोग?
यह सहयोग Prada Spring 2026 Menswear Show के बाद शुरू हुआ। इस शो में पारंपरिक डिजाइन से प्रेरित फुटवियर पेश किए गए, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे बढ़ी।
इसके बाद प्राडा का एक प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र के Kolhapur शहर पहुंचा, जहां उन्होंने स्थानीय कारीगरों से मुलाकात की और उनके काम को करीब से समझा।
बातचीत के बाद मुंबई स्थित Consulate General of Italy in Mumbai में लिडकॉम और प्राडा के बीच आधिकारिक समझौता (MoU) साइन किया गया।
स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिलेगी
पारंपरिक कोल्हापुरी चप्पलों को अंतरराष्ट्रीय ब्रांड वैल्यू मिलेगी
रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे
यह समझौता महाराष्ट्र की पारंपरिक कला को दुनिया के फैशन मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


