मुंबई वार्ता/सतीश सोनी

उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया कि महाराष्ट्र, गोवा और केंद्र शासित प्रदेश दमन एवं दीव के सांसदों और विधायकों के विरुद्ध विभिन्न चरणों में कुल ४७८ मामले लंबित हैं। न्यायालय ने इनके शीघ्र निपटारे के लिए समय-सीमा भी निर्धारित की।


उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंकद की पीठ ने यह भी कहा कि सांसदों और विधायकों के विरुद्ध लंबित मामलों की संख्या बहुत अधिक है।उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार, जिन मामलों में अंतिम बहस चल रही है, उनमें न्यायाधीश अगले ३० दिनों में यह प्रक्रिया पूरी करें, जिसके बाद मामले में शीघ्र फैसला सुनाया जाए। वहीं, जिन मामलों में सरकारी गवाहों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उनमें संबंधित निचली अदालत को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा ३१३ के तहत साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों के बयान दर्ज करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया गया है।


इस प्रक्रिया को पूरा करते हुए, जमानत पर चल रहे अभियुक्त को तलब किया जाए। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जेल में बंद आरोपी का बयान अदालत में उसकी उपस्थिति पर ज़ोर देने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए दर्ज किया जाए।
न्यायालय ने सरकारी वकील मनकुंवर देशमुख को 19 दिसंबर को इन सभी आदेशों के पालन पर एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।


