मुंबई वार्ता संवाददाता

पूरे भारत में चुनावों में वोटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली ‘इवीएम’ ’ मशीनें हर चुनाव के नतीजों के बाद खबरों में रहती हैं। कई राजनीतिक पार्टियां, चाहे वे विपक्ष में हों या हारने वाली पार्टी, इन मशीनों के भरोसे पर सार्वजनिक रूप से शक जता चुकी हैं। भारत के चुनाव आयोग ने बार-बार इस बात की पुष्टि की है कि ऐसी वोटिंग भरोसेमंद और सुरक्षित है। अब इस बहस ने महाराष्ट्र में एक नया, लेकिन गंभीर मोड़ ले लिया है।


राज्य चुनाव आयोग ने मंगलवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव प्रफुल्ल गुड्डे की याचिका पर नागपुर बेंच में एक हलफनामा दायर किया और बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों में ‘वीवीपेट’ के इस्तेमाल के लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं है।
बुधवार को मामले में हुई बहस के बाद, स्थानीय निकाय नियमों में ‘इवीएम’ ’ के इस्तेमाल को लेकर कोई प्रावधान नहीं है।साथ ही, कोई गाइडलाइन भी जारी नहीं की गई हैं। इसलिए, लोकल बॉडी इलेक्शन में इवीएम’ के इस्तेमाल के कानूनी आधार पर सवाल उठाते हुए, बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने स्टेट इलेक्शन कमीशन को गुरुवार, २० नवंबर तक जवाब देने का आदेश दिया।


कांग्रेस के नेशनल सेक्रेटरी प्रफुल्ल गुड्डे पाटिल ने आने वाले इलेक्शन में वीवीपेट’ के इस्तेमाल को लेकर एक पिटीशन फाइल की थी। इस मामले की सुनवाई जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस रजनीश व्यास के सामने हुई।


मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान, स्टेट इलेक्शन कमीशन ने एफिडेविट फाइल करके पिटीशन का जवाब दिया। लोकल बॉडी इलेक्शन में इवीएम’ के साथ वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपेट’ ) मशीनों का इस्तेमाल करना मुमकिन नहीं है। इसके अलावा, वीवीपेट’ के इस्तेमाल के बारे में संबंधित कानून में कोई प्रोविजन नहीं है।
इलेक्शन कमीशन ने कहा कि इतने कम समय में लाखों वीवीपेट’ मशीनें बनाना या बैलेट पेपर के लिए जरूरी सामान तैयार करना मुमकिन या फिजिबल नहीं है। पिटीशनर साइड ने इस पर एतराज जताया और दलीलें दीं। इलेक्शन कमीशन को इस बारे में जवाब देने का आदेश दिया गया।



सही निर्णय