मुंबई वार्ता संवाददाता

मुंबई विश्वविद्यालय के कलिना और फोर्ट परिसर स्थित छात्रावासों में विद्यार्थियों को कथित तौर पर स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य, सुरक्षा, भोजन की गुणवत्ता और पढ़ाई के लिए उचित वातावरण जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं को लेकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के महाराष्ट्र प्रदेश महासचिव एडवोकेट अमोल मातले ने मुंबई विश्वविद्यालय के प्रो-कुलपति डॉ. अजय भांबरे और कुलसचिव डॉ. प्रसाद कारंडे से मुलाकात कर तत्काल कार्रवाई की मांग की।


मातले ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपकर सभी छात्रावासों का व्यापक सुविधा ऑडिट कराने और इसके आधार पर 30 दिनों की सुधार कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से आने वाले तथा सामाजिक-आर्थिक रूप से संवेदनशील पृष्ठभूमि के हजारों विद्यार्थी इन छात्रावासों में रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे में उन्हें सुरक्षित, स्वच्छ और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उन्होंने महाराष्ट्र सार्वजनिक विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 की धारा 108 और विश्वविद्यालय के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन का कानूनी दायित्व है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यार्थियों से पूरी फीस लेने के बावजूद आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराना उनके साथ अन्याय है।
छात्रावासों के व्यापक ऑडिट की मांग
ज्ञापन में सभी छात्रावासों का स्वतंत्र जांच दल के माध्यम से स्ट्रक्चरल, इलेक्ट्रिकल, फायर सेफ्टी और स्वच्छता संबंधी तत्काल ऑडिट कराने की मांग की गई है। ऑडिट में सामने आने वाली कमियों को दूर करने के लिए समयबद्ध कार्ययोजना जारी करने की भी मांग की गई।
पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था सुधारने पर जोर
बंद पड़े वॉटर कूलर, वाटर प्यूरिफायर और पंखों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की गई है। साथ ही छात्रावासों में उपलब्ध पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच कर उसकी रिपोर्ट सूचना पट्ट पर प्रदर्शित करने और शौचालयों की रोजाना सफाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
24 घंटे सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधा
ज्ञापन में प्रत्येक छात्रावास में 24 घंटे सुरक्षा गार्ड और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई है। छात्राओं के छात्रावास में केवल महिला सुरक्षा गार्ड और महिला कर्मचारियों की नियुक्ति करने का सुझाव दिया गया है।
मेस के भोजन की नियमित जांच
छात्रावासों की मेस में विद्यार्थियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए नियमित फूड इंस्पेक्शन कराने की मांग की गई है, ताकि भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित की जा सके।
स्टडी रूम, वाई-फाई और काउंसलिंग सेंटर
मातले ने सभी छात्रावासों में पर्याप्त स्टडी रूम, हाई-स्पीड वाई-फाई और विद्यार्थी वेलनेस/काउंसलर सेंटर शुरू करने की मांग की। उनका कहना है कि छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक और मानसिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण होना चाहिए।
इसके अलावा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए रैंप, लिफ्ट और विशेष रूप से अनुकूलित शौचालय उपलब्ध कराने की मांग भी ज्ञापन में की गई है।
शिकायत निवारण समिति बनाने की मांग
विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान करने के लिए ‘हॉस्टल ग्रिवांस रिड्रेसल कमेटी’ गठित करने की मांग की गई है। इस समिति के माध्यम से हर महीने विद्यार्थी प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर छात्रावासों की समस्याओं की समीक्षा करने का सुझाव दिया गया है।
मातले ने यह भी मांग की कि छात्रावासों के ऑडिट की रिपोर्ट विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए और 30 दिनों की स्पष्ट ‘एक्शन प्लान’ जारी की जाए।
‘सिर्फ रहने की जगह देना पर्याप्त नहीं’
एडवोकेट अमोल मातले ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल रहने की जगह उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक, सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण में रहने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि फीस लेने के बावजूद सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन मांगों पर जल्द कार्रवाई करते हुए स्पष्ट कार्ययोजना जारी नहीं की, तो राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) विद्यार्थियों के न्यायसंगत अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से लगातार और तीव्रता से संघर्ष करेगी।


