■ राणे, दरेकर और लाड थे अनुपस्थित.
मुंबई वार्ता संवाददाता

कोरोना काल के दौरान हुए एक पुराने मामले ने अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के लिए संकट खड़ा कर दिया है। सिंधुदुर्ग मंत्री नितेश राणे, विधायक प्रवीण दरेकर व प्रसाद लाड को कुडाल न्यायालय ने कड़ा संदेश दिया है। न्यायालय ने इन तीनों नेताओं के खिलाफ गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है।


ज्ञात हो कि यह मामला 26 जून 2021 को हुए ‘ओबीसी आरक्षण’ आंदोलन से जुड़ा है। कोरोना प्रतिबंधों के बावजूद यह आंदोलन सिंधुदुर्ग जिले में आयोजित किया गया था। आंदोलन के दौरान नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में कुडाल पुलिस ने नितेश राणे, निलेश राणे, राजन तेली सहित कुल 42 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
आज कुडाल न्यायालय में इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई में विधायक निलेश राणे, राजन तेली और कुछ अन्य आरोपी उपस्थित थे। लेकिन कैबिनेट मंत्री नितेश राणे और अन्य 5 आरोपी गैरहाजिर रहे। नितेश राणे पहले भी कई बार न्यायालय की तारीखों पर अनुपस्थित रह चुके हैं। लगातार गैरहाजिर रहने पर न्यायालय ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।इस मामले में नितेश राणे के वकील ने अर्जी दी थी, लेकिन न्यायालय ने उसे खारिज कर गैर जमानती वारंट तुरंत लागू करने के आदेश दिए।
इसी तरह, संविधान बचाव आंदोलन से जुड़े मामले में प्रवीण दरेकर और प्रसाद लाड को भी न्यायालय ने कड़ा संदेश दिया है।सत्ताधारी दल के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ सीधे गिरफ्तारी वारंट निकलने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अब सभी की नजर इस पर है कि मंत्री नितेश राणे और दोनों विधायक न्यायालय में हाजिर होकर इन वॉरंट को रद्द कराते हैं या पुलिस कार्रवाई आगे बढ़ती है।



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