मुंबई वार्ता संवाददाता

महाराष्ट्र में नगर निगम चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सीट बंटवारे की कवायद के बीच कई दलों को लगातार झटके लग रहे हैं। मुंबई महानगरपालिका चुनाव की पृष्ठभूमि में शहर का सियासी माहौल गर्म है। ठाकरे बंधुओं की हालिया एकजुटता के बाद अब महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राज्य सचिव और राज ठाकरे के बेहद भरोसेमंद सहयोगी रहे सुधाकर तांबोली ने MNS को अलविदा कह दिया है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना (शिंदे गुट) में प्रवेश कर लिया है।


सुधाकर तांबोली भारतीय विद्यार्थी सेना के दौर से ही राज ठाकरे के साथ जुड़े रहे हैं। MNS की स्थापना के बाद से उन्होंने पार्टी में अहम भूमिका निभाई। मुंबई विश्वविद्यालय की सीनेट चुनाव में MNS की ओर से लगातार दो बार जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी संगठनात्मक ताकत साबित की थी। हालांकि, बीते कुछ समय से उनके पार्टी में सक्रिय न होने की चर्चाएं चल रही थीं। आखिरकार, देर रात वर्षा बंगले पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में उन्होंने शिंदे गुट की शिवसेना जॉइन कर ली।राज्य में बदलते राजनीतिक समीकरणों पर चर्चाएं तेज हैं।
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की खुली राजनीतिक नजदीकी को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में राज ठाकरे के पुराने सहयोगी का पार्टी छोड़ना MNS के लिए व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों ही दृष्टि से बड़ा झटका माना जा रहा है। आगामी मुंबई महानगरपालिका चुनाव को देखते हुए शिंदे गुट द्वारा MNS के असंतुष्ट नेताओं को अपने पाले में लाने की रणनीति अपनाई जा रही है।उधर, उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की बढ़ती नजदीकियों से MNS के कुछ पुराने पदाधिकारियों में असहजता देखी जा रही है। कभी शिवसेना के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने वाले कई नेता बदली हुई राजनीति को लेकर दुविधा में हैं।
सुधाकर तांबोली का पार्टी परिवर्तन इसी असंतोष का नतीजा माना जा रहा है। उनके शामिल होने से शिंदे गुट को मुंबई में एक अनुभवी संगठनकर्ता और विश्वविद्यालय राजनीति में मजबूत चेहरा मिला है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में मिल सकता है।मुंबई महानगरपालिका पर कब्जे के लिए सभी दलों ने अब पूरी ताकत झोंक दी है। ठाकरे बंधुओं की संभावित एकजुटता से जहां विरोधियों की चुनौती बढ़ी है, वहीं एकनाथ शिंदे लगातार MNS और ठाकरे गुट के अहम नेताओं को अपने साथ जोड़ने में जुटे हैं।
चुनाव से ठीक पहले तांबोली के जाने से मुंबई में MNS की संगठनात्मक स्थिति पर क्या असर पड़ता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। आने वाले समय में और भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे मुंबई का सियासी मैदान और दिलचस्प होने वाला है।


