डॉ मंजू लोढ़ा/स्तंभकार/मुंबई वार्ता

हर साल की तरह 2025 भी आया और चला गया, पर यह साल केवल कैलेंडर का बदलना नहीं था।यह अनुभवों का ऐसा अध्याय रहा,जिसे पलटते समयमन अपने-आप ठहर जाता है।यह वर्ष हमें यह सिखा गया किजीवन केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं,बल्कि विपरीत परिस्थितियों मेंइंसान बने रहने की परीक्षा भी है।जम्मू-कश्मीर के पहलगाम मेंपर्यटकों को निशाना बनाकर किया गयाआतंकी हमलाकेवल निर्दोष जानें ही नहीं ले गया,बल्कि पूरे देश कोगहरे शोक और आक्रोश में डुबो गया।


लंदन जाने वालीअंतरराष्ट्रीय उड़ान कातकनीकी खराबी के कारणदुर्घटनाग्रस्त होनावैश्विक स्तर परविमान सुरक्षा परगंभीर प्रश्न छोड़ गया। दिल्ली और उत्तर भारत मेंआतंकी घटनाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा की भावना कोऔर गहरा किया।प्रकृति भी इस वर्षकुछ कम कठोर नहीं रही।हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड , महाराष्ट्र और असम मेंभारी वर्षा, बाढ़ और भूस्खलन नेकई परिवारों सेउनके घर, आजीविकाऔर सहारे छीन लिए। मुंबई और नवी मुंबई मेंभीषण आग की घटनाएँऔर भांडुप कीBEST बस दुर्घटना ने महानगर की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी कोअचानक थाम लिया।दूर मध्य-पूर्व और यूक्रेन में जारी युद्धों की तपिश,महँगाई, अस्थिरताऔर मानव संकट बनकर पूरी दुनिया ने महसूस की।सच यही है—2025 ने हमें कड़वे घूँट पिलाए।पर इसी कठिन समय में हमने अपनी सामूहिक शक्ति भी देखी।


आतंकी घटनाओं के बाद देश की निर्णायक प्रतिक्रिया और ऑपरेशन सिंदूर जैसेसख़्त कदमों नेयह स्पष्ट कर दिया किभारत अब केवल सहने वाला देश नहीं—वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता को लेकरपूरी तरह सजग और सक्षम है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का नेतृत्वइस वर्षएक दृढ़, जुझारू और आत्मविश्वासीवैश्विक व्यक्तित्व के रूप मेंऔर उभरकर सामने आया।अंतरराष्ट्रीय मंचों परभारत की आवाज़सिर्फ़ सुनी ही नहीं गई,उसका सम्मान भी किया गया।देशवासियों के मन में यह भरोसा गहरा हुआ ,कि सशक्त नेतृत्व के कारण, हम अपेक्षाकृत निश्चिंत होकरअपना जीवन जी पा रहे हैं।दुख और संकट के बीचदेश–विदेश से संवेदना, सहायताऔर प्रार्थनाओं कीएकजुटता भी हमने देखी।NDRF, SDRF,फायर ब्रिगेड,मेडिकल टीमें और स्वयंसेवक—थके हुए शरीर,पर अडिग संकल्प के साथकई जानें बचाने में सफल रहे।आपदा प्रबंधन की क्षमतापहले से अधिकमजबूत दिखाई दी।खेलों के क्षेत्र मेंभारत नेअंतरराष्ट्रीय स्तर परउल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कीं।विशेषकर महिला खिलाड़ियों कीसफलताओं नेदेश कोनया गर्व दिया।
इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे परमेट्रो परियोजनाएँ,एक्सप्रेसवे,रेलवे आधुनिकीकरणऔर वंदे भारत ट्रेनों नेयात्रा कोअधिक सुरक्षितऔर सुविधाजनक बनाया। ISRO के सफल अंतरिक्ष मिशनों नेयह भरोसा दिया कि भारत की उड़ानअब केवल धरती तक सीमित नहीं—वह अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी है।डिजिटल इंडिया के अंतर्गतUPI, AI, फिनटेकऔर स्टार्ट-अप इकोसिस्टम नेभारत कोतकनीक का उपभोक्ता नहीं,बल्कि नवाचार का केंद्र बनाया।महिला सशक्तिकरण,शिक्षा,डिजिटल कृषि,स्वास्थ्य शिविर,योग और मानसिक स्वास्थ्य परबढ़ता ज़ोर—ये सभी संकेत थे कि विकास की समझअब अधिक मानवीय हो रही है।युवाओं की सामाजिक भागीदारीऔर स्वयंसेवी कार्यों मेंउनकी सक्रियता नेभविष्य के प्रतिआशा कोऔर मजबूत किया।2025 ने हमेंरुलाया भी,और संभलना भी सिखाया।इस साल ने यह भी समझाया किजीवन कोसिर्फ़ जीया नहीं जाता—कभी-कभीउसे सीपीआर भी देनी पड़ती है।जब साँसें थमती हैं,तो यादों को बटोरना पड़ता है।जब हौसला टूटता है,तो अनुभवधड़कन बनते हैं।
हर सालकितनी सीपियाँ छोड़ जाता है—कुछ से हम मोती निकाल लेते हैं,कुछ बसरेत में चमकती रह जाती हैं।पर वे व्यर्थ नहीं जातीं—वे हमें याद दिलाती हैं कि हमनेपूरी शिद्दत सेजिया था।जीवन अनमोल है।कठिनाइयों के बीचमिला हुआ यह अवसरहर पल खर्च करने के लिए नहीं—हर पल महसूस करने के लिए है।जो बीत गया,वह अनुभव बन गया। जो मिला,वह कृतज्ञता बन गया। हमने यह खोया,और हमने यह पाया। शायदयही 2025 कीसबसे बड़ी सीख है।
अलविदा 2025।स्वागत 2026—और अधिक सजग,और अधिक करुणामयइंसान बनने के संकल्प के साथ। ईश्वर से यही प्रार्थना है। प्रधानमंत्री मोदी जी दीर्घायु हो और उनके नेतृत्व में देश सुरक्षित सशक्त और शांतिपूर्ण मार्ग पर आगे बढ़ता रहे, ताकि नागरिक निश्चिंत होकर सुख की नींद सो सके।



नव वर्ष मंगलमय हो