मुंबई वार्ता संवाददाता

कांदिवली (पूर्व) स्थित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मैदान में श्री नारायण सेवा समिति, मुंबई के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञानयज्ञ के अष्टम पावन दिवस पर आज कथा अपने निष्कर्षात्मक चरण में प्रविष्ट हुई। संपूर्ण पंडाल भक्ति, वैराग्य और आत्ममंथन के वातावरण से परिपूर्ण रहा।


श्रद्धालुओं में यह अनुभूति स्पष्ट थी कि कथा अब केवल श्रवण नहीं, बल्कि जीवन में उतारने का आह्वान कर रही है।जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि श्रीमद् भागवत मनुष्य को संसार से भागना नहीं सिखाती, बल्कि संसार में रहते हुए उससे मुक्त होना सिखाती है।


उन्होंने कहा कि भागवत का मूल संदेश विवेक है, क्योंकि“विवेकः परमं ज्ञानम्” — विवेक ही सर्वोच्च ज्ञान है।स्वामीजी ने कहा—“जब तक मनुष्य भोग को ही जीवन मानता है, तब तक अशांति रहती है; और जब सेवा, संयम और समर्पण जीवन का आधार बन जाते हैं, तभी भागवत का प्रकाश अंतःकरण में उतरता है।”इस संदर्भ में उन्होंने श्लोक उद्धृत किया—“न कर्मणा न प्रजया धनेन,त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।”अर्थात् त्याग से ही अमरत्व अर्थात् परम शांति की प्राप्ति होती है।
अष्टम दिवस पर स्वामीजी ने उद्धव–गोपी संवाद, ब्रह्मर गीत, राजा परीक्षित के वैराग्य, कलियुग के धर्म तथा नाम-स्मरण की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कलियुग में यदि कोई सरलतम साधना है, तो वह—“हरेर्नाम हरेर्नाम हरेर्नामैव केवलम्।कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा॥”उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भागवत कथा का उद्देश्य केवल कथा–श्रवण नहीं, बल्कि चरित्र शुद्धि और सामाजिक चेतना का निर्माण है, क्योंकि—“धर्मो रक्षति रक्षितः”अर्थात् धर्म की रक्षा करने पर धर्म स्वयं मनुष्य की रक्षा करता है।
स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज ने कहा कि वर्ष 2025 सनातन चेतना के पुनर्जागरण का वर्ष रहा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के ध्वजारोहण को उन्होंने सनातन संस्कृति के उत्सव और राष्ट्रीय आत्मगौरव का प्रतीक बताया। साथ ही काशी, उज्जैन, द्वारका और बद्रीनाथ जैसे तीर्थों में बढ़ती श्रद्धालु सहभागिता को उन्होंने यह प्रमाण बताया कि—“यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत…”धर्म की हानि होने पर ईश्वर स्वयं उसके संरक्षण हेतु प्रकट होते हैं।
कार्यक्रम में प्रतिदिन की भांति आज भी विशाल संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भजन–कीर्तन और हरिनाम संकीर्तन से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्तिरस से ओतप्रोत रहा।


