श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5’ (NFHS-5) के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में 52.2 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया (रक्ताल्पता) से पीड़ित हैं। यह स्थिति न केवल माताओं के स्वास्थ्य के लिए, बल्कि होने वाले बच्चे के भविष्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।


एनएफएचएस-4 (2015-16) की तुलना में एनएफएचएस-5 (2019-21) में एनीमिया के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। हीमोग्लोबिन की कमी से होने वाला यह रोग मातृ मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। एनीमिया के कारण समय से पहले प्रसव और नवजात शिशु का कम वजन जैसी समस्याएं सामने आती हैं।


■ महाराष्ट्र की स्थिति
महाराष्ट्र में 45 से 50 प्रतिशत गर्भवती महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त हैं। राज्य में ‘एनीमिया मुक्त भारत’ अभियान के तहत आयरन की गोलियों का वितरण किया जा रहा है, लेकिन पोषण और संतुलित आहार को लेकर अभी भी व्यापक जनजागरूकता की जरूरत है।
● एनीमिया के प्रमुख कारण
असंतुलित आहार और पौष्टिक भोजन की कमी,बार-बार गर्भधारण और कम अंतराल में प्रसव,किशोरावस्था में विवाह,अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं,ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में समस्या अधिक , गंभीर इलाज और सावधानियां, एनीमिया के उपचार के लिए रोग की गंभीरता की पहचान जरूरी है।
हल्के एनीमिया में मुंह से दी जाने वाली आयरन युक्त सप्लीमेंट दवाएं प्रभावी होती हैं।— डॉ. रेखा डावर, वरिष्ठ स्त्रीरोग विशेषज्ञ।
● अन्य महत्वपूर्ण कारणआहार संबंधी बाधाएं:
अनाज में मौजूद ‘फाइटेट्स’ आयरन के अवशोषण में रुकावट डालते हैं।
जीवनचक्र की कमी: किशोरावस्था से ही एनीमिया होने पर गर्भावस्था में आयरन का भंडार पहले से कम होता है।
बीमारियां और संक्रमण: कृमि संक्रमण और मलेरिया जैसी बीमारियों से शरीर में आयरन तेजी से घटता है।
रक्त विकार: मासिक धर्म की अत्यधिक समस्या या ‘वॉन विलेब्रांड’ जैसे रक्त विकार भी आयरन की कमी का कारण बनते हैं।
राज्यों में एनीमिया की स्थिति (गर्भवती महिलाएं)
लद्दाख: 78.1%
बिहार: 63.1%
गुजरात: 62.6%
पश्चिम बंगाल: 62.3%
मिजोरम: 27.9% (बेहतर स्थिति)
नागालैंड: 22.2% (सबसे कम)
विशेषज्ञों का मानना है कि पोषण, समय पर जांच, आयरन सप्लीमेंट और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाकर इस गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।


