श्रीश उपाध्याय/मुंबई वार्ता

मुंबई में कचरा प्रबंधन पर खर्च में बीते एक साल में करीब 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2025-26 के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के वित्तीय दस्तावेजों के अनुसार, शहर के घन कचरा प्रबंधन (वेस्ट मैनेजमेंट) पर 5,548 करोड़ रुपये खर्च किए गए।इतने भारी खर्च के बावजूद, राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण 2025 की रिपोर्ट में मुंबई को देश के 10 सबसे गंदे शहरों की सूची में शामिल किया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार, कचरा प्रबंधन के मामले में मुंबई को देश के 40 शहरों में 33वां स्थान मिला है।यह स्थिति पड़ोसी शहर नवी मुंबई के बिल्कुल विपरीत है, जिसे देश का तीसरा सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया गया है।इस बीच, 15 जनवरी को होने वाले मुंबई महानगरपालिका चुनावों से पहले शहर की सफाई और स्वच्छता एक बार फिर प्रमुख मुद्दा बन गई है।


नागरिक संगठनों द्वारा जारी विभिन्न सिटिज़न मेनिफेस्टो में कचरा प्रबंधन की बदहाल स्थिति पर गंभीर चिंता जताई गई है।चांदिवली CHA मेनिफेस्टो में फुटपाथों पर लगने वाले कचरे के ढेर से निपटने के लिए प्रभावी नीति की मांग की गई है।MNDCF सिटिज़न चार्टर ने झुग्गी-झोपड़ी इलाकों में ठोस कचरा प्रबंधन नियमों (SWM Rules) के सख्त पालन और कचरा प्रबंधन के लिए मार्शलों की नियुक्ति की मांग की है।
मुंबई मार्च मेनिफेस्टो में भी बेहतर स्वच्छता व्यवस्था पर जोर दिया गया है।वहीं, लोकखंडवाला ओशिवारा सिटिज़न्स एसोसिएशन (LOCA) ने शहर में वर्षों से मौजूद स्थायी कचरा डंपिंग पॉइंट्स को पूरी तरह खत्म करने की अपील की है।चुनाव से पहले सामने आई ये रिपोर्ट और नागरिकों की मांगें, मुंबई की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।


