मुंबई वार्ता संवाददाता

हाल ही में संपन्न मुंबई नगर निकाय चुनावों में एक लाख से अधिक मतदाताओं ने किसी भी राजनीतिक दल को वोट न देकर NOTA (नोटा – इनमें से कोई नहीं) का विकल्प चुना। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 15 जनवरी को हुए मतदान में कुल 54,76,043 वोट पड़े, जिनमें से 1,00,327 मत NOTA को मिले, जो कुल मतदान का 1.83 प्रतिशत है। इस चुनाव में कुल मतदान प्रतिशत 52 प्रतिशत दर्ज किया गया।


शहर भर में डाले गए कुल मतों में सबसे अधिक NOTA वोट पश्चिमी उपनगरों में दर्ज किए गए। दहिसर से बांद्रा तक पश्चिमी उपनगरों में 47,936 मतदाताओं ने NOTA चुना, जो वहां पड़े कुल मतों का 1.9 प्रतिशत है। यही क्षेत्र शहर में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत के लिए भी जाना गया।


सबसे अधिक मतदान 62.04 प्रतिशत बोरिवली के वार्ड 18 में दर्ज किया गया, जबकि दहिसर के वार्ड 4 में 60.67 प्रतिशत मतदान हुआ।
पूर्वी उपनगरों में, भांडुप से सायन तक 29,101 NOTA वोट पड़े, जो कुल मतदान का 1.7 प्रतिशत है। वहीं दक्षिण मुंबई के इलाकों — कोलाबा, माहिम और माटुंगा — में 23,290 मतदाताओं ने NOTA का विकल्प चुना, जो कुल मतों का 1.8 प्रतिशत रहा।
दक्षिण मुंबई के वार्ड 226 में NOTA को सबसे अधिक 1,404 वोट मिले, जो वहां पड़े कुल मतों का 5.1 प्रतिशत है। इस वार्ड में कुल मतदान प्रतिशत 50 प्रतिशत दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, NOTA को मिल रहे बढ़ते वोट मतदाताओं की राजनीतिक दलों के प्रति नाराज़गी और बेहतर विकल्पों की मांग को दर्शाते हैं।


