मुंबई वार्ता संवाददाता

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र को सूखामुक्त बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई नदी जोड़ परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए केंद्र सरकार से आर्थिक सहायता देने का अनुरोध किया गया है। यह मांग राज्य की ओर से केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के समक्ष रखी गई।


राज्य के सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा के लिए नई दिल्ली में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की अध्यक्षता में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में महाराष्ट्र के जलसंपदा मंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटिल, मंत्री गिरीश महाजन, केंद्रीय जलशक्ति विभाग के सचिव कांताराव, आयुक्त प्रवीण कुमार, अपर मुख्य सचिव दीपक कपूर, सचिव डॉ. संजय बेलसरे सहित राज्य के सभी पाटबंधारे महामंडलों के कार्यकारी संचालक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।बैठक में राज्य में चल रही सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी केंद्रीय मंत्री को दी गई। इन परियोजनाओं की प्रगति पर केंद्रीय मंत्री ने संतोष व्यक्त किया।


प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र के कुल 29 परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें कोंकण पाटबंधारे विकास महामंडल की 5, विदर्भ पाटबंधारे विकास महामंडल की 7, कृष्णा खोरे विकास महामंडल की 9, गोदावरी विकास महामंडल की 4 तथा तापी पाटबंधारे विकास महामंडल की 4 परियोजनाएं शामिल हैं।जलसंपदा मंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटिल ने बताया कि कृष्णा और गोदावरी परियोजनाओं के अंतर्गत चल रही 13 परियोजनाओं में से 10 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं, बलिराजा जलसंजीवनी योजना के तहत कृष्णा और गोदावरी महामंडलों की 15 परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं, जबकि शेष दो परियोजनाओं को शीघ्र पूरा करने के प्रयास जारी हैं।
केंद्रीय मंत्री सी.आर. पाटिल ने इन परियोजनाओं की गति बढ़ाकर उन्हें पूर्ण करने में सहयोग का आश्वासन दिया।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में राज्य को सूखामुक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर नदी जोड़ परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। इनमें प्रमुख रूप से दमनगंगा–एकदरे–गोदावरी, दमनगंगा–वैतरणा–गोदावरी, कोंकण–गोदावरी खोरे, नलगंगा–वैनगंगा और पार–गोदावरी परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता बताते हुए जलसंपदा मंत्री डॉ. राधाकृष्ण विखे पाटिल और मंत्री गिरीश महाजन ने केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
बैठक में यह भी बताया गया कि अहिल्यानगर जिले की नीलवंडे-2 परियोजना का कार्य पूर्ण हो चुका है और उसमें जलसंचय भी हो रहा है। बाएं और दाएं नहरों का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। नहरों की लाइनिंग का कार्य प्रगति पर है और पानी के वितरण के लिए बंद पाइप प्रणाली अपनाने की नीति तय की गई है। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 2,038 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव को मंजूरी देने की मांग की गई है।
यदि यह निधि उपलब्ध होती है, तो बंद पाइप वितरण प्रणाली के माध्यम से 64,260 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई कार्य तेजी से पूरा होने का विश्वास व्यक्त किया गया।


