भिवंडी तालुका में ईंट भट्ठा पर बंधुआ मजदूरी करने वाले मज़दूर को मिली 8 साल बाद आजादी।

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■ भट्ठा मालिक पर SC-ST एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज, आरोपी फरार।

मुंबई वार्ता/कृष्ण गोपाल सिंह

भिवंडी तालुका से बंधुआ मजदूरी (वेठबिगारी) का एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ईंट-भट्ठे पर पिछले आठ वर्षों से अमानवीय हालात में काम कराने जा रहे कातकरी आदिम जनजाति के युवक दिनेश सुरेश भोईर को सामाजिक संगठन भूमिपुत्र एल्गार संघटना के कार्यकर्ताओं ने मुक्त कराया है।

इस मामले में गणेशपुरी पुलिस ने ईंट-भट्ठा मालिक कल्पेश सूर्यकांत पाटील के खिलाफ बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता की धारा और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पीड़ित मजदूर दिनेश भोईर को महज़ 75 हजार रुपये की अग्रिम राशि (बयाना) के बदले ईंट-भट्ठे पर काम के लिए मजबूर किया गया था। आरोप है कि इस दौरान उसका लगातार शारीरिक, मानसिक और आर्थिक शोषण किया गया। मारपीट, धमकी और पत्नी को बार-बार फोन कर बुलाने जैसे दबावों के चलते वह आत्महत्या के कगार तक पहुंच गया था।

मामले की जानकारी मिलते ही भूमिपुत्र एल्गार संघटना के सरचिटणीस नवनाथ भोये और कातकरी युवा कार्यकर्ता मृणाली पवार ने पीड़ित की मदद करते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस ने कॉल रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच के बाद FIR नंबर 0010/2026 के अनुसार आरोपी पर: BNS 2023: धारा 115(2), 352, 351(2) SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम: धारा 3(2)(va), 3(1)(r), 3(1)(s) बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, 1976: धारा 16, 17, 18 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गुन्हा दर्ज होने के बाद से आरोपी कल्पेश पाटील फरार बताया जा रहा है। पीड़ित मजदूर को धमकाने, लालच देने और झूठे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की कोशिशें होने का भी आरोप सामने आया है। इस संबंध में एक अलग शिकायत भी पुलिस में दर्ज की गई है।इसी बीच, बंधुआ मजदूर को मुक्त कराने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रमोद पवार और सुनील लोणे पर फर्जी अत्याचार और बदनामी का मामला दर्ज कराए जाने का आरोप लगाया गया है।

संगठन का कहना है कि यह कार्रवाई आरोपी मालिक को बचाने और संगठन के बढ़ते काम को रोकने की साजिश है। संगठन ने स्पष्ट किया कि जिस लेख के आधार पर शिकायत कराई गई, उसमें किसी महिला का नाम, गाली-गलौज या अपमानजनक भाषा नहीं है, बल्कि वह आदिवासी मजदूरों के अधिकार और संरक्षण से जुड़ा लेख है।

■ राजनीतिक संरक्षण के आरोप, न्याय की मांग

स्थानीय कातकरी समाज ने आरोप लगाया है कि आरोपी एक बड़े संगठन का पदाधिकारी होने के कारण उसे राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। भूमिपुत्र एल्गार संघटना के अध्यक्ष प्रमोद पवार ने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पीड़ित को न्याय दिलाने की मांग की है।

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